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Gym Trainerऔर उसके दोस्त ने मेरी चुत के लिए घंटो तक मजे

मेरा नाम तन्वी है। मेरी गुफा और खाई की कहानियाँ तो मशहूर हैं ही, आज एक नई दास्ताँ सुनाती हूँ। ये कहानी है मेरे जिम ट्रेनर विक्की और उसके दोस्त कबीर की, जिन्होंने मिलकर मेरी ऐसी-वैसी कर दी कि मैं दो दिन तक सीधे चल नहीं पाई।

दरअसल, मैं रोज़ सुबह जिम जाया करती थी। विक्की मेरा पर्सनल ट्रेनर था। उसकी बॉडी देखकर ही पता चल जाता था कि उसका औज़ार कितना मज़बूत और मुसल होगा। एक दिन वो बोला, “तन्वी, तुम्हारी स्टेमिना बहुत कम है। तुम्हें कुछ एक्स्ट्रा सेशन की ज़रूरत है। शनिवार की रात को जिम खाली रहता है, वहाँ आ जाओ, तुम्हें अलग से ट्रेन करूँगा।”

मैं समझ गई कि ये ट्रेनिंग जिम के बैरल्स पर नहीं, बल्कि मेरी गुफा और खाई पर होने वाली है। शनिवार को मैं टाइट लेगिंग और क्रॉप टॉप पहनकर पहुँच गई। जिम बिल्कुल खाली था। विक्की अपने दोस्त कबीर के साथ था, जो कि एक स्विमिंग कोच था और उसकी बॉडी भी कोई कम नहीं थी।

“ये कबीर है,” विक्की ने इंट्रो दिया, “आज ये हमारी ट्रेनिंग में हेल्प करेगा।”

मैंने मन ही मन में सोचा, ‘दोनों का औज़ार एक साथ लेने का मौका मिलेगा।’ मेरी गुफा ने तुरंत हल्की सी झनझनाहट महसूस की।

पहले तो विक्की ने मुझे कुछ हल्के-फुल्के एक्सरसाइज करवाए, ताकि मेरी बॉडी वार्म अप हो जाए। फिर वो बोला, “अब तुम्हें स्ट्रेचिंग करवानी है, ताकि तुम्हारी फ्लेक्सिबिलिटी बढ़े।”

मैं मैट पर लेट गई। विक्की ने मेरी एक लेग उठाई और अपने कंधे पर रख ली। उसकी पकड़ बहुत मज़बूत थी। इधर कबीर मेरी दूसरी लेग को संभालने लगा। अचानक विक्की ने मेरी लेग को थोड़ा और खोल दिया। मेरी टाइट लेगिंग के कारण मेरी पूरी खाई का आउटलाइन साफ़ दिख रहा था।

“तुम तो बहुत टाइट हो तन्वी,” विक्की ने कहा, “तुम्हें रिलैक्स करना पड़ेगा।”

यह कहकर उसने अपना एक उँगली मेरी खाई के दरवाज़े पर रख दिया और प्रेशर डालना शुरू कर दिया। मैं कराह उठी। लेगिंग के ऊपर से ही उसका प्रेशर मेरी गहराई तक जा रहा था। इधर कबीर ने मेरे स्तनों को दबाना शुरू कर दिया, उन्हें रब करने लगा। मेरी साँसें तेज़ हो गईं।

“सर… ये स्ट्रेचिंग नहीं हो रही है… ये तो कुछ और ही हो रहा है,” मैंने हाँफते हुए कहा।

“बिल्कुल सही पकड़ा,” कबीर हँसा, “असली ट्रेनिंग तो अब शुरू होगी।”

विक्की ने मेरी लेगिंग उतारने में देरी नहीं की। उसकी उँगलियाँ सीधे मेरी चिकनी खाई पर पहुँच गईं। उसने मेरी चटाई को अँगूठे से रब किया। मैं तड़प उठी।

“सर, अब और नहीं… अब औज़ार से ही खोद डालो,” मैं गिड़गिड़ाई।

विक्की ने अपना शॉर्ट्स उतार दिया। उसका मोटा काला औज़ार तनी हुई तोप की तरह मेरे सामने खड़ा था। कबीर का भी औज़ार निकल चुका था, थोड़ा पतला लेकिन लंबा।

“पहले मुँह का स्वाद लेते हैं,” विक्की बोला।

उसने अपना औज़ार मेरे मुँह की ओर बढ़ाया। मैंने अपने होठों से उसे पकड़ लिया और अंदर लेने लगी। वो इतना मोटा था कि मेरे मुँह के कोने फटने लगे। इधर कबीर ने मेरी गुफा चाटनी शुरू कर दी। उसकी जीभ बहुत तेज़ थी, बिल्कुल अपने स्विमिंग स्ट्रोक की तरह।

विक्की का औज़ार मेरे मुँह में ज़ोर-ज़ोर से धकेला जा रहा था। मैं उसकी जड़ तक पहुँचने की कोशिश कर रही थी। मेरी आँखों से आँसू निकल आए, लेकिन वो रुका नहीं। अचानक उसने अपना औज़ार बाहर निकाला और मेरे चेहरे पर थूक दिया।

“अब तेरी गुफा की बारी है,” उसने गुर्राकर कहा।

विक्की मेरे ऊपर चढ़ गया। उसने अपने औज़ार को मेरी गुफा के दरवाज़े पर टिकाया। मेरी गुफा पहले से ही कबीर की जीभ से गीली और तैयार थी। वो एक झटके में अंदर घुस गया। मैं चीख़ पड़ी। उसका औज़ार मेरी गुफा को चीरता हुआ अंदर तक जा रहा था।

“अरे! सर! ये बहुत मोटा है!” मैं चिल्लाई।

“चुप रहो और झेलो,” विक्की ने कहा और धक्का मारना शुरू कर दिया।

इतने में कबीर ने मेरा सिर उठाया और अपना औज़ार मेरे मुँह में घुसेड़ दिया। अब मेरी गुफा और मुँह दोनों एक साथ भर चुके थे। दोनों तरफ़ से ज़ोरदार धक्के लग रहे थे। पच-पच की आवाज़ आ रही थी। मेरा शरीर उछल रहा था।

“और तेज़, सर! और गहरा!” मैं चीख़ने लगी।

विक्की ने मेरी टांगें और फैला दीं और ज़ोर से धक्का मारा। कबीर ने मेरे बाल पकड़कर मेरा सिर अपनी ओर खींच लिया। मैं दोनों के धक्कों के बीच पिस रही थी।

थोड़ी देर में विक्की की साँसें तेज़ हो गईं। “मैं निकलने वाला हूँ तन्वी,” उसने कराहकर कहा।

उसने अपना औज़ार बाहर निकाला और मेरी गुफा के बाहर ही अपना गाढ़ा सफेद माल उड़ेल दिया। गर्म माल मेरी जाँघों पर बहने लगा।

अब कबीर की बारी थी। विक्की की जगह कबीर मेरे ऊपर आ गया। उसने मुझे पलटकर घोड़ी बना दिया। उसका पतला लेकिन लंबा औज़ार मेरी गुफा में आसानी से घुस गया और उसने तेज़ी से चलना शुरू कर दिया। उसकी स्पीड बहुत ज़्यादा थी।

“तेरी गुफा तो बहुत टाइट है,” कबीर हाँफता हुआ बोला।

विक्की ने मेरे सामने आकर अपना औज़ार फिर से मेरे मुँह में दे दिया। “इसे साफ़ करो,” उसने आदत दी।

मैं चूसने लगी। कबीर के धक्कों से मेरा सिर आगे-पीछे हो रहा था, जिससे विक्की का औज़ार मेरे गले तक उतर रहा था।

कबीर ने ज़ोर का एक धक्का मारा और चिल्लाया, “ले तन्वी… ले अपना माल!”

उसने अपना वीर्य मेरी गुफा की गहराई में छोड़ दिया। मैं भी एक झटके के साथ झड़ गई। मेरी गुफा का पानी उसके वीर्य के साथ मिलकर बाहर निकल आया।

हम तीनों हाँफते हुए मैट पर गिर पड़े। थोड़ी देर आराम करने के बाद विक्की उठा और जिम के वेट्स वाले एरिया से एक डंबल लेकर आया। वो लंबा और मोटा सा डंबल रॉड था।

“अब इससे ट्रेनिंग होगी,” उसने शैतानी अंदाज़ में कहा।

मैं डर गई, लेकिन मेरी गुफा फिर से कराह उठी। कबीर ने उस डंबल रॉड पर ल्यूब्रीकेंट लगाया। विक्की ने मुझे दोबारा मैट पर लिटा दिया और धीरे-धीरे वो ठंडा मोटा रॉड मेरी गुफा में दाखिल करना शुरू किया। ठंडक से मैं चीख़ पड़ी, लेकिन फिर उसका मोटापन एक अजीब सी मस्ती देने लगा।

कबीर ने मेरे मुँह में अपना औज़ार दोबारा थमा दिया। विक्की ने डंबल रॉड को अंदर-बाहर करना शुरू किया। मेरी गुफा का विस्तार हो रहा था।

“आज तो तेरी गुफा की पूरी वर्कआउट हो गई,” विक्की ने हँसते हुए कहा।

करीब दो घंटे तक चले इस सेशन के बाद मेरी हालत खराब हो गई थी। मेरी गुफा और खाई दोनों सूज गई थीं। लेकिन मज़ा भी खूब आया था। अब वो दोनों मुझे रोज़ एक्स्ट्रा सेशन के लिए बुलाने लगे हैं। और मैं भी हर बार नए जोश के साथ पहुँच जाती हूँ। आखिर मेरी गुफा को भी तो अपनी ट्रेनिंग पूरी करनी है ना!

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