अभय ने नया घर लिया था। पहले दिन ही, जब वह अपना सामान उतार रहा था, उसकी नज़र सामने वाले घर की बालकनी में खड़ी एक लड़की पर पड़ी। वह गमलों में पानी दे रही थी। उसके लंबे, काले बाल धूप में चमक रहे थे और उसकी साधारण सी सलवार सूट में भी वह किसी परी की तरह लग रही थी। उसका नाम अनन्या था, अभय को बाद में पता चला।
अभय एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, जो वर्क फ्रॉम होम करता था। अनन्या कॉलेज में पढ़ती थी। कुछ हफ्ते तक, उनके बीच बस इतना ही होता—एक झिझक भरी मुस्कान, एक हल्की सी नमस्ते।
अभय ने उसे इम्प्रेस करने का फैसला किया। वह जानता था कि सीधे जाकर बात करना अजीब होगा।
उसने एक प्लान बनाया।
पहला कदम: एक बहाना
एक शाम, अभय के पास एक पार्सल आया। जानबूझकर, उसने डिलीवरी बॉय को गलत पता दिया था। जब डिलीवरी बॉय ने अनन्या के घर का घंटी बजाई, तो अभय बाहर आया और एक्टिंग करने लगा।
“अरे! यह तो मेरा पार्सल है। शायद गलत एड्रेस हो गया। बहुत बड़ी गलती हो गई,” उसने डिलीवरी बॉय से कहा, आवाज़ इतनी जोर से कि अनन्या सुन सके।
अनन्या दरवाजे पर आई। अभय ने मौका देखकर उससे बात की।
“माफ़ कीजिएगा, इस stupid delivery guy के कारण आपको परेशानी हुई।”
अनन्या मुस्कुराई, “कोई बात नहीं। आप नए आए हैं ना? मैं अनन्या हूँ।”
“अभय,” उसने अपना नाम बताया और हाथ मिलाया। उसका हाथ नर्म और गर्म था।
दूसरा कदम: दोस्ती की नींव
उस दिन के बाद, बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया। वह बालकनी में मिलते, कभी मौसम के बारे में बात करते, कभी सामान्य सी बातें। अभय ने देखा कि अनन्या को किताबें पढ़ना बहुत पसंद है। एक दिन, उसने उसे एक किताब उपहार में दी—एक ऐसी किताब जिसके बारे में उन्होंने पहले चर्चा की थी।
अनन्या की आँखों में चमक आ गई। “वाह! यह तो मेरी फेवरेट राइटर की किताब है। आपको कैसे पता?”
“तुमने कल जिक्र किया था,” अभय ने साधारण सा जवाब दिया, मगर अन्दर से खुशी से फूला नहीं समा रहा था।
वह उसकी सूक्ष्म बातों को याद रखता, उसकी पसंद-नापसंद का ध्यान रखता। धीरे-धीरे, उनकी बातचीत लम्बी होने लगी। व्हाट्सएप पर भी बातें होने लगीं।
तीसरा कदम: एक शाम की शुरुआत
एक शुक्रवार की शाम, अनन्या का एक ऑनलाइन क्लास कैंसल हो गया। अभय ने मौका देखा।
“सुनो, मैं कुछ अच्छा सा पास्ता बना रहा हूँ। अगर तुम्हारा कोई प्लान नहीं है, तो चाहो तो…?” उसने संकोच से पूछा।
अनन्या ने हाँ कह दी।
अभय ने जानबूझकर अपना बेस्ट पास्ता बनाया, मोमबत्तियाँ जलाईं, और हल्का सा म्यूज़िक लगा दिया। वह नहीं चाहता था कि यह जल्दबाजी में हो। वह चाहता था कि अनन्या सहज महसूस करे।
खाने के दौरान बातें हुईं, हँसी हुई। अभय ने उसे अपने काम के फनी अनुभव सुनाए, और अनन्या ने कॉलेज के अपने किस्से सुनाए। बातों ही बातों में, अनन्या का हाथ टेबल पर पड़ा था और अभय ने अपना हाथ हल्के से उस पर रख दिया। अनन्या ने अपना हाथ पीछे नहीं खींचा। उसकी आँखों में एक सहमती थी।
चौथा कदम: पहला चुम्बन
खाना खत्म होने के बाद, वह सोफे पर बैठे थे। म्यूज़िक बज रहा था। अभय ने अनन्या की ओर देखा। चाँदनी खिड़की से अंदर आ रही थी और उसके चेहरे पर पड़ रही थी।
“तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो,” अभय ने फुसफुसाया।
अनन्या शरमा गई। अभय ने धीरे से उसका चिन अपनी उँगलियों से उठाया और उसके होंठों को अपने होंठों से छुआ। यह चुम्बन कोमल था, धीरे-धीरे गहराता गया। अनन्या ने जवाब दिया, उसने अपनी बाँहें उसकी गर्दन के चारों ओर डाल दीं।
कुछ देर बाद, साँसें तेज होने पर ही वह अलग हुए। अनन्या का चेहरा लाल था, और वह मुस्कुरा रही थी।
“मुझे लगता है मुझे जाना चाहिए,” उसने कहा, लेकिन उसकी आँखों ने कुछ और कहा।
“क्यों?” अभय ने पूछा, उसके करीब जाकर।
“क्योंकि अगर मैं नहीं गई… तो मैं शायद यहीं रुकना चाहूँगी,” उसने कहा।
अभय ने उसे फिर से चूमा, यह चुम्बन पहले से भी ज्यादा जुनूनी था। “तो रुक जाओ,” उसने उसके कान में फुसफुसाया।
पाँचवां कदम: शारीरिक नज़दीकी
अभय ने अनन्या को उठाया और बेडरूम की ओर ले गया। कमरे में केवल चाँद की रोशनी आ रही थी। उसने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर हो गया, अपने होंठों से उसकी गर्दन, उसके कान का मुलायम हिस्सा चूमता हुआ।
उसने धीरे-धीरे उसकी कुर्ती के बटन खोले। हर बटन के खुलने पर अनन्या की साँसें और तेज होती जा रही थीं। कुर्ती खुल गई, और उसके अंदर एक साधारण सा लेस वाला ब्रा था। अभय ने उसके ब्रा के स्ट्रैप्स को उतारा और उसके स्तनों को अपने हाथों में ले लिया। वह नर्म और कड़क थे। उसने अपने अंगूठे से उसके निप्पल्स को घुमाया, जो सख्त होकर उभर आए थे।
“अभय…” अनन्या ने कराहते हुए कहा।
अभय ने अपना सिर नीचे किया और उसके एक निप्पल को अपने मुँह में ले लिया, चूसना शुरू कर दिया। अनन्या ने अपनी उँगलियाँ उसके बालों में घोंप दीं और एक लम्बी सी आह भरी।
उसने उसकी सलवार और अंदर की पैंटी भी उतार दी। अब अनन्या पूरी तरह से नग्न थी, चाँदनी में चमक रही थी। अभय ने उसे निहारा—वह बिल्कुल सुन्दर थी।
“तुम परफेक्ट हो,” उसने कहा।
फिर वह भी अपने कपड़े उतारने लगा। अनन्या ने भी उसकी मदद की, उसकी शर्ट के बटन खोले। जब उसने उसका बॉक्सर्स उतारा, तो उसकी आँखें चौंधिया गईं। उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उसे हल्के से छुआ।
अभय ने एक कंडोम पहना और धीरे से उसके ऊपर आ गया। उसने उसके कान में फुसफुसाया, “तैयार हो?”
अनन्या ने सिर हिलाकर हाँ कहा, उसकी आँखों में एक उत्सुकता थी।
वह धीरे-धीरे उसके अंदर घुसा। अनन्या ने तीखी सांस भरी, और उसने अपनी उँगलियाँ उसकी पीठ में घोंप दीं। वह थोड़ी देर रुका, उसे adjust करने का time दिया।
“ठीक है?” उसने पूछा।
“हाँ… बस… धीरे-धीरे,” उसने जवाब दिया।
अभय ने एक लयबद्ध गति शुरू की, धीरे-धीरे, गहराई से। हर thrust के साथ, अनन्या की कराहने की आवाज़ें गहरी और ज्यादा बेकाबू होती गईं। वह उसकी गर्दन को चूमता रहा, उसके स्तनों को दबाता रहा।
जल्द ही, वह दोनों एक दूसरे के साथ तालमेल बिठाने लगे। अनन्या ने अपनी एड़ियों से उसकी पीठ को दबाया, उसे और गहराई तक ले जाने के लिए। कमरे में सिर्फ उनकी हांफने और चादरों के सरसराने की आवाज़ें गूंज रही थीं।
अभय ने महसूस किया कि अनन्या का शरीर तनने लगा है। उसने और तेजी से thrust करना शुरू किया। “अभय! मैं जा रही हूँ!” अनन्या चीखी, और उसका शरीर एक जोरदार झटके के साथ काँप उठा।
यह देखकर, अभय भी खुद को रोक नहीं पाया। वह भी एक गहरी, गर्म रिलीज की लहर में बह गया, उसके ऊपर झुककर कराह उठा।
अंत: एक नई शुरुआत
कुछ देर बाद, वे दोनों एक-दूसरे के गले लगाए लेटे थे, उनकी साँसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं।
“वाह,” अनन्या ने फुसफुसाया, अभय की छाती पर अपना सिर रखे हुए। “यह… अद्भुत था।”
अभय ने उसे चूमा। “तुम्हारे साथ सब कुछ अद्भुत है।”
उस रात अनन्या उसके साथ ही रुकी। अगली सुबह, जब अभय की नज़र खुली, तो अनन्या उसे देखकर मुस्कुरा रही थी।
“तो… अब मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड हूँ, है ना?” उसने शरारत से पूछा।
“नहीं,” अभय ने कहा और देखा कि उसका चेहरा उतर गया। फिर वह मुस्कुराया, “तुम सिर्फ मेरी गर्लफ्रेंड नहीं हो। तुम मेरी पड़ोस की प्यारी हो, और शायद भविष्य में और भी कुछ हो।”
अनन्या ने उसे गले से लगा लिया। उनके रिश्ते की यह सिर्फ शुरुआत थी, और आने वाली कई रातों का वादा करती हुई।