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एक बुजुर्ग अंकल नई मेरी गांड मारी

मेरा नाम कावेरी है और मेरा फिगर 34-30-38 है। 💃 मेरी पीछे वाली गुफा ही सबको मेरा दीवाना बना देती है। आज की कहानी मेरी सच्ची कहानी है, जिसमें एक बुजुर्ग अंकल मेरी पीछे वाली गुफा के फैन हो गए और मैंने उनके साथ पैसे लेकर रप्पा-रप्पा करने का फैसला किया। 😈

पिछले हफ्ते मैं अकेली एक मॉल में घूमने गई थी। 🛍️ मॉल में घुसते ही मैंने अपने पास मौजूद सारे पैसे से शॉपिंग कर ली। फिर एक दुकान पर पहुँची जहाँ सेल लगी थी, लेकिन मेरे पास पैसे खत्म हो चुके थे। 💸 मैं बाहर निकली और अपने दोस्तों को पैसे के लिए फ़ोन करने लगी, पर सबने मना कर दिया। मैं उदास सी बैठ गई, तभी एक आवाज आई, “बुरा ना मानो तो मैं दे दूँ जितना पैसा तुझे चाहिए?”

मैंने उस आवाज़ की तरफ देखा तो एक बुजुर्ग अंकल मेरे पास बैठे थे। 👴 वो बोले, “चाहिए या नहीं?” मैंने कहा, “हाँ।” उन्होंने कहा, “तो तुझे मुझे खुश करना होगा।” मैं कुछ देर सोच में पड़ गई। मन में सोचा, ये बूढ़े अंकल कितनी देर तक टिक पाएँगे? इनका औज़ार तो शायद खड़ा भी नहीं होगा। 🤔 फिर वो बोले, “क्या सोच रही है इतना?” मैंने हामी भर दी और बोली, “पहले मुझे शॉपिंग करनी है।”

मैंने जमकर शॉपिंग की और अंकल ने सारा बिल चुकाया। फिर हम पार्किंग में उनकी कार के पास पहुँचे। 🚗 उन्होंने मुझे कार में बिठाया और एक घर ले आए। घर पहुँचते ही उन्होंने मुझे पानी पिलाया और कुछ स्नैक्स दिए। फिर मेरा नाम पूछा, मैंने बताया प्रीति (मेरा नकली नाम)। वो बोले, “नाम और पीछे वाली गुफा, दोनों कमाल के हैं।” फिर बोले, “चल अब बिस्तर पर।” 🔥

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वो मुझे एक कमरे में ले गए। उन्होंने कहा, “कपड़े खुद उतारेगी या मैं उतारूँ?” मैंने कहा, “मैं खुद उतार देती हूँ।” मैंने पहले अपनी शर्ट उतारी, अंकल ने मेरे ऊपर वाले छोटे कपड़े में कुछ पैसे ठूंस दिए। 💰 फिर मैंने पैंट उतारी, वो मुझे देखते रह गए। आप सब जानते हैं, मैं नीचे वाले कपड़े कम ही पहनती हूँ और उस दिन भी नहीं पहने थे। 😉

अंकल ने मुझे अपनी तरफ खींचा और बिस्तर पर लेटाकर मेरी मौत की खाई को चाटने लगे। 👅 मैं उनके सामने घोड़ी बन गई। अब मेरी मौत की खाई और पीछे वाली गुफा उनके सामने थी। अंकल मेरी पीछे वाली गुफा और मौत की खाई को चाटने लगे, कभी मेरी पीछे वाली गुफा में ऊँगली डालते, तो कभी मेरी मौत की खाई में। ये सब काफी देर तक चला। फिर मेरी मौत की खाई ने पानी छोड़ दिया। 💦 अंकल ने मुँह लगाकर सारा पानी पी लिया।

उनका औज़ार भी खड़ा था। अंकल ने बिना देर किए अपने औज़ार को गीला किया और एक ही बार में मेरी पीछे वाली गुफा में डाल दिया। 🍑 जैसे ही उनका औज़ार मेरी पीछे वाली गुफा में गया, मैं ज़ोर से चीख पड़ी। मैं उछलने लगी, लेकिन अंकल ने मुझे कसकर पकड़ लिया। मुझे आज तक इतना दर्द कभी नहीं हुआ था। 😭 अंकल बिना रुके मेरी पीछे वाली गुफा में औज़ार डालकर रप्पा-रप्पा करने लगे। मेरे मुँह से “हाय, मैं मर गई” जैसी आवाजें निकलने लगीं। अंकल बोले, “कोई बात नहीं प्रीति, तेरी माँ को भी उसकी नानी याद दिला दूँगा।”

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मेरी बॉडी ढीली पड़ने लगी, तब अंकल ने मेरे बाल पकड़ लिए और मुझे पूरी तरह घोड़ी बनाकर मेरी पीछे वाली गुफा में रप्पा-रप्पा करने लगे। मेरी हालत खराब होने लगी लेकिन मैं कर भी क्या सकती थी? जो सोचा था वो तो हुआ नहीं, अंकल तो बड़े दमदार निकले। काफी देर बाद अंकल के औज़ार ने लावा छोड़ दिया। मेरी पूरी पीछे वाली गुफा उनके लावे से भर गई। 🥵

मैं वैसे ही लेटी रही। मेरे पीछे वाली गुफा में बहुत दर्द हो रहा था। कुछ देर बाद मैं उठी और लंगड़ाते हुए बाथरूम चली गई। काफी देर बाद बड़ी मुश्किल से चलते हुए बाहर आई तो देखा अंकल का औज़ार (सात इंच लंबा और चार इंच मोटा) फिर से खड़ा हो चुका था। अंकल बोले, “प्रीति, देख फिर से मैदान में उतरने को तैयार है।” मैंने कहा, “अंकल, अब नहीं हो पाएगा मुझसे, बहुत दर्द हो रहा है।” 😠

ये सुनते ही अंकल भड़क गए और बोले, “साली, तेरे पीछे वाली गुफा ही मुझे भा गई थी… अब तू ही है और तुझे ही रप्पा-रप्पा करूँगा।” यह कहकर अंकल ने मेरे पीछे वाली गुफा पर एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। मैं उछल पड़ी। फिर अंकल ने मुझे बेड के किनारे झुका दिया। अंकल ने कोई क्रीम ली और मेरी पीछे वाली गुफा के छेद पर लगाई। मुझे थोड़ा सुकून मिला, लेकिन उससे पहले अंकल ने फिर से अपना औज़ार मेरी पीछे वाली गुफा में उतार दिया। 😬

अंकल धीरे-धीरे अपनी रफ़्तार बढ़ाने लगे। मुझे अब मज़ा आने लगा था। मैंने भी अपनी पीछे वाली गुफा का छेद खोलकर उनके औज़ार को अंदर लेना शुरू किया। मैं भी अब अंकल से बोलने लगी, “और ज़ोर से रप्पा-रप्पा करो! आज मुझे पूरी तरह मस्त बना दो!” अंकल मेरी बात सुनकर मेरी पीछे वाली गुफा को और ज़ोर से रप्पा-रप्पा करने लगे। काफी देर बाद उनके औज़ार ने फिर से मेरी पीछे वाली गुफा को अपने लावे से भर दिया। 😴

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मैं फ्रेश होकर बाहर आई। अंकल मेरे लिए खाने का सामान ले आए। शाम के 7 बज चुके थे। मैंने अंकल से कहा, “मुझे मॉल छोड़ दीजिए।” अंकल बोले, “अभी तो मज़ा शुरू हुआ था।” मैंने हँसते हुए कहा, “मेरी जैसी मस्तमौला की कीमत इतनी ही है।” फिर मैंने अंकल के औजार को मुँह में लिया और थोड़ा चाटने के बाद अपने कपड़े पहनने लगी। मैं तैयार हो गई। अंकल ने मुझे कुछ और पैसे दिए और बोले, “प्रीति, यह कल की बुकिंग का एडवांस है।”

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