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मेरी दीदी सोनिया की चुदाई

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम शौर्य है और मैं हरियाणा में रहता हूँ। मेरी उम्र अभी 22 साल है। आज मैं आपको अपनी ज़िंदगी की सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। यह बात आज से करीब 2 साल पहले की है, जब मैं 20 वर्ष का था और गर्मियों में मई के महीने में अपने परिवार, यानी मम्मी, पापा और दीदी के साथ, अपनी बुआ जी के घर अम्बाला गया था। मेरी दीदी का नाम सोनिया है और वह मुझसे 4 साल छोटी है।

एक दिन की बात है कि घर के सब लोग इकट्ठे बाज़ार गए थे, सिर्फ़ दीदी और मैं, हम दोनों घर में ही रह गए थे क्योंकि बाहर बहुत तेज़ धूप थी और हमारी उनके साथ जाने की बिल्कुल इच्छा नहीं थी। दोपहर के 12:00 बजे वे लोग बाज़ार के लिए चले गए और मैं अपनी दीदी सोनिया के साथ घर में अकेला था। मैं निक्कर और टी-शर्ट पहने हुए था और मेरी दीदी सोनिया ने घुटनों तक की स्कर्ट पहनी हुई थी।

बातों-बातों में दीदी ने मुझसे पूछा, “भाई, चाय पियोगे क्या?”

तो मैंने कह दिया, “अगर तेरी इच्छा है चाय की तो मैं भी पी लूँगा, बना ले।” तो दीदी चाय बनाने के लिए रसोई में चली गई और मैं कमरे में बैठा टीवी देख रहा था। जब दीदी उठकर रसोई में गई तो उठते हुए उसकी स्कर्ट के नीचे से मुझे उसकी हल्की-सी पैंटी दिख गई। मैं काफ़ी पहले से पिलाई के बारे में जानता था और औजार सहलाना भी शुरू कर चुका था, इसलिए दीदी की पैंटी और उसके संतरों को देखकर मेरे दिमाग में उसके साथ कुछ शरारत करने का मन करने लगा था।

तभी मैं उठकर अपनी दीदी के पास रसोई में चला गया और उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया। दीदी ने पीछे मुड़कर देखा तो वो बोलीं, “क्या हुआ भाई, रसोई में क्यों आ गए? यहाँ बहुत गर्मी है।” मैं बोला, “दीदी, कुछ नहीं, बस अंदर अकेले बैठे हुए बोर हो रहा था।” अब मेरी नज़र दीदी की स्कर्ट पर थी।

मेरा औजार अपनी दीदी की फुदी के बारे में सोच-सोचकर पूरा तनाव में हो गया था, तो मैंने सोचा कि बाथरूम में जाकर एक बार औजार को ही सहला लेता हूँ। मैंने बाथरूम में जाकर अपनी दीदी को ख्यालों में नंगा करके उसके नाम से औजार सहलाने लगा। आह! दीदी के नाम से औजार सहलाने में ही मुझे इतना ज़्यादा मज़ा आया कि पूछो मत!

इसी दौरान दीदी चाय लेकर कमरे में आ गईं। जब दीदी ने मुझे कमरे से गायब पाया तो उसने मुझे आवाज़ लगाई, “भाई, कहाँ हो? आ जाओ, चाय ठंडी हो जाएगी।” मैं फटाफट से अपने हाथ धोकर बाथरूम से बाहर निकलकर कमरे में आया।

अब हम दोनों भाई-बहन बिस्तर पर बैठकर टीवी देखने लगे और साथ-साथ चाय भी पी रहे थे। मैं बीच-बीच में चोर नज़र से उसकी ओर देख रहा था। इस बार बिस्तर पर बैठने से दीदी की स्कर्ट ज़रा-सी ऊपर को सरक गई थी, तो उसकी थोड़ी-थोड़ी पैंटी मुझे दिख रही थी। मैं बस अपनी दीदी की फुदी और संतरों के बारे में सोचते हुए चाय पीता रहा।

चाय खत्म करने के बाद, मैंने कुछ शरारत करने का सोचकर उससे कहा, “दीदी, चल कुछ खेल खेलते हैं।”

वह हँसने लगी, बोली, “क्या खेल खेलते हैं? अब हम बच्चे थोड़े न रह गए हैं।”

मैं बोला, “दीदी, हम बचपन में सबसे ज़्यादा चोर-पुलिस वाला खेल खेलते थे, तो आज भी वही खेल खेलें।”

दीदी बोली, “ठीक है भाई, मैं चोरनी बनती हूँ और तुम पुलिसवाले सिपाही।”

मैंने दीदी से कहा, “तू कोई चीज़ चोरी कर, फिर मैं तुझे पकड़ूँगा।” दीदी रसोई में चली गई और कुछ चुराने का नाटक करने लगी। तभी मैं उसके पीछे रसोई में पुलिस मैन बनकर गया और दीदी को पकड़ने के लिए उस पर झपटा। मैंने दीदी को पीछे से कसकर पकड़ लिया और वह मेरी बाहों से छूटने की कोशिश करने लगी।

मैंने गुस्से में दीदी से कहा, “अबे ए चोरनी, सच-सच बता, वरना तेरी स्कर्ट उतारकर चेक करूँगा! पुलिस वाले के सामने झूठ बोलने की हिम्मत!”

दीदी हँसते हुए बोली, “अरे छोड़ भाई, यह कौन-सा पुलिस वाला बना है जो बेचारी अपनी बहन को ही परेशान कर रहा है?”

मैंने ज़ोर से घुर्राते हुए कहा, “चुप! हम पुलिस वालों को मज़ाक पसंद नहीं। तूने रसोई से बिस्कुट का डिब्बा चुराया है, मैंने देख लिया।”

दीदी ने मुँह बनाकर कहा, “अच्छा जी, तो फिर पकड़ के दिखाओ ना!” और वह वहाँ से भागने लगी, तभी मैंने उसकी कमर पकड़कर खींच लिया।

मैं दीदी की तलाशी लेने का नाटक करने लगा और उसके पूरे शरीर को कपड़ों के ऊपर से दबा-दबाकर देखने लगा। दीदी मना करती रहीं, पर मैंने दीदी की कोई बात नहीं सुनी और मैं उसकी स्कर्ट निकालने की कोशिश करने लगा। मैंने दीदी के दोनों हाथ कसकर पकड़ लिए और उसकी स्कर्ट नीचे खिसकाकर निकालने लगा। मैंने उसकी स्कर्ट नीचे खींचकर निकाल ही दी। अब वह मेरे सामने सिर्फ़ शर्ट और पैंटी में थी।

दीदी बोलने लगी, “भाई, तुम यह क्या कर रहे हो? खेल में इतना सब कुछ नहीं करते हैं।”

मैंने दीदी को कहा, “यार, ऐसे ही खेलेंगे, ऐसे ही मज़ा आएगा। जब तू पुलिस वाली बनेगी तो तू भी मेरे साथ जो चाहे कर लेना।”

फिर मैंने दीदी के दोनों हाथ पकड़ लिए और कहा, “मैं तुम्हें चोरी के इल्ज़ाम में गिरफ़्तार करता हूँ,” और यह कहते हुए मैंने उसके दोनों हाथ एक कपड़े से बाँध दिए। दीदी अब इसे भी खेल ही समझ रही थी। फिर मैंने उसके बाल पकड़े और उसके पैरों को फैलाकर पूछा, “बता, कहाँ छुपा के रखा है चोरी का माल?” ऐसा कहते ही मैंने उसकी पैंटी निकाल दी और अब मेरी दीदी मेरे सामने नीचे से नंगी हो गई।

उसकी फुदी पर छोटे-छोटे बाल थे। दीदी मुझे कहने लगी, “प्लीज़ भाई, अब मुझे यह खेल नहीं खेलना है।”

पर मैं कहाँ मानने वाला था। मैंने कहा, “चुप कर चोरनी, एक तो चोरी करती है और ऊपर से ज़ुबान लड़ाती है।” यह कहकर मैं उसके दोनों पैरों को फैलाकर अपना चेहरा उसके पैरों के बीच ले जाकर उसकी फुदी को गौर से देखने लगा। मैंने अपनी एक उँगली फुदी में अंदर कर दी और बोला, “चोरी का माल इसके अंदर छुपाया है क्या?” यह कहकर मैं उसकी फुदी को अपनी एक उँगली से सहलाने लगा।

इतना सब होने के बाद, अब मेरी दीदी भी मज़ा लेने लगी थी, पर मुझे दिखाने के लिए शरीफ़ बन रही थी। मैंने उसकी फुदी में अपनी एक उँगली अंदर कर दी और ज़ोर-ज़ोर से अंदर-बाहर करने लगा। उसकी फुदी में से थोड़ा-थोड़ा रस निकलने लगा तो मैं समझ गया कि मेरी दीदी भी पिलाई चाहती है।

अब मैं उसकी शर्ट निकालने की कोशिश करने लगा। मैंने उसकी शर्ट उसके शरीर से निकालकर उसकी बाँहों तक कर दी थी। अब मेरी आँखों के सामने दीदी के मस्त, छोटे-छोटे से संतरे थे। जब मुझसे रुका न गया, तो मैंने उसके संतरों को अपने मुँह में भर लिया और मेरी दीदी आवाज़ करने लगी। अब दीदी भी आह-ऊह की आवाज़ें करने लगीं और अपने संतरों को मेरे चेहरे पर दबाने लगी।

अब तो मुझे हरी झंडी मिल गई। मैंने तुरंत उसके हाथ खोले, उसकी शर्ट निकाली और उसे गले से लगाया। अब मैंने दीदी के होंठों को किस किया और उसे चूमने लगा। कुछ देर बाद मैंने अपना निक्कर नीचे खिसकाकर अपना औजार बाहर निकाला और अपनी दीदी के हाथ में थमा दिया। दीदी बड़े ध्यान से मेरे औजार को देख रही थी। मैंने उसे औजार पर हाथ आगे-पीछे करने को कहा, तो दीदी वैसे ही करने लगी।

अब मैंने देर करना उचित नहीं समझा और मैंने बिना देर किए उसे कमरे में लाकर बेड के किनारे बिठाकर लिटा दिया। मैंने दीदी के पैर उठाए और अपना औजार उसकी फुदी पर रखकर अंदर को धकेला, तो मेरा औजार फुदी में रगड़ता हुआ अंदर चला गया और दीदी के मुँह से ज़ोर की आवाज़ निकल गई, “आह!”

मैं अब दीदी की धीरे-धीरे पिलाई करने लगा। दीदी भी अपने पीछे के हिस्से को थोड़ा-थोड़ा ऊपर-नीचे करके मेरा साथ देने लगी। अब मैं अपनी दीदी की पिलाई तेज़-तेज़ करने लगा। 10 मिनट की पिलाई के बाद, मैं होने ही वाला था तो मैंने दीदी को बिना बताए अपना औजार उसकी फुदी से बाहर निकालकर उसके संतरों पर अपना रस निकाल दिया। मैं हैरान था कि मेरी दीदी मुझसे पिलाई करने के बाद भी हँस रही थी।

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