अध्याय 1: शुरुआत की चिंगारी
दिल्ली की चिलचिलाती गर्मी अब रात के ठंडे स्पर्श में बदल चुकी थी। नेहा, 28 साल की एक महत्वाकांक्षी महिला, अपनी कॉर्पोरेट जॉब में दिन भर की भागदौड़ से थक चुकी थी। वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर थी, जहां मीटिंग्स, डेडलाइन्स और बॉस की डांट रोज का हिस्सा थे। लेकिन शाम ढलते ही उसकी जिंदगी बदल जाती थी। नेहा का फ्लैट, जो दिल्ली के पॉश इलाके में था, उसकी निजी दुनिया था – जहां वह अपनी इच्छाओं को आजाद छोड़ सकती थी।
नेहा का बॉयफ्रेंड रोहन, 30 साल का फिटनेस ट्रेनर, उसकी जिंदगी का वह हिस्सा था जो उसे सबसे ज्यादा उत्तेजित करता था। दोनों की मुलाकात दो साल पहले एक जिम में हुई थी। नेहा वहां वर्कआउट करने आई थी, और रोहन की मसल्स भरी बॉडी और आत्मविश्वास ने उसे पहली नजर में आकर्षित कर लिया था। “तुम्हारी बॉडी कितनी सेक्सी है,” रोहन ने पहली बार फ्लर्ट करते हुए कहा था, और नेहा ने हंसकर जवाब दिया, “देखो, लेकिन छुओ मत… अभी।” उस दिन से उनका रिश्ता शुरू हुआ – पहले दोस्ती, फिर प्यार, और अब एक जुनूनी आकर्षण जो हर रात को आग में बदल देता था।
आज रात नेहा घर लौटी तो थकी हुई थी। उसने अपना सूट उतारा और एक सिल्की गाउन पहन लिया, जो उसके कर्व्स को पूरी तरह उभारता था। उसके ब्रेस्ट्स गोल और फर्म थे, कमर पतली, और हिप्स ऐसे कि कोई भी मर्द पागल हो जाए। नेहा आईने के सामने खड़ी होकर खुद को देख रही थी। “आज रोहन आएगा,” उसने सोचा, और उसकी चूत में एक हल्की सी सिहरन दौड़ गई। रोहन ने मैसेज किया था – “आज रात तेरी चूत को चोदकर आग लगाऊंगा।” नेहा की उंगलियां अनायास ही अपनी चूत पर फिसल गईं, लेकिन उसने खुद को रोका। “नहीं, इंतजार करो,” उसने खुद से कहा।
दरवाजे की घंटी बजी। नेहा ने दरवाजा खोला तो रोहन खड़ा था – उसकी टी-शर्ट उसके चौड़े सीने पर चिपकी हुई थी, और जींस में उसका लंड का उभार साफ नजर आ रहा था। “क्या बात है, बेबी? आज इतनी हॉट लग रही हो,” रोहन ने मुस्कुराते हुए कहा, और उसे अपनी बाहों में खींच लिया। नेहा की सांसें तेज हो गईं। रोहन के हाथ उसके कमर पर फिसले, और वह उसे दीवार से सटा कर किस करने लगा। उनके होंठ मिले – गर्म, गीले, और जुनूनी। रोहन की जीभ नेहा के मुंह में घुस गई, और नेहा ने उसे चूसना शुरू कर दिया। “आह… रोहन,” नेहा ने सिसकी, जबकि रोहन का हाथ उसके गाउन के नीचे सरक गया।
“तेरी चूत आज कितनी गीली है?” रोहन ने फुसफुसाते हुए पूछा, और अपनी उंगली नेहा की चूत पर रगड़ी। नेहा की बॉडी में बिजली दौड़ गई। “हाँ… छूओ मुझे,” उसने कहा। रोहन ने उसे उठाया और बेडरूम की ओर ले गया। कमरे में हल्की रोशनी थी, और बिस्तर पर गुलाब की पंखुड़ियां बिखरी हुई थीं – रोहन का सरप्राइज। नेहा को बिस्तर पर लिटाकर रोहन उसके ऊपर झुक गया। “आज मैं तुझे ऐसे चोदूंगा कि तू भूल न पाए,” उसने कहा, और नेहा का गाउन ऊपर सरका दिया।
अध्याय 2: स्पर्श की लहरें
नेहा की आंखें बंद थीं, और वह रोहन के हर स्पर्श का इंतजार कर रही थी। रोहन ने अपना शर्ट उतारा – उसकी मसल्स चमक रही थीं, छाती चौड़ी, और एब्स ऐसे कि नेहा की उंगलियां उन पर फिसलने को बेताब थीं। “तेरा लंड कितना कड़ा है,” नेहा ने कहा, जबकि रोहन का हाथ उसके ब्रेस्ट्स पर सरक गया। उसने उन्हें जोर से दबाया, और नेहा की सिसकी निकल गई – “आह… दबाओ और जोर से!” रोहन ने नेहा की ब्रा उतारी, और उसके निप्पल्स को मुंह में लेकर चूसने लगा। नेहा की बॉडी में कंपकंपी दौड़ गई। “हाँ… चूसो मेरे चूचे को,” उसने कराहते हुए कहा।
रोहन नीचे सरका। उसने नेहा की पैंटी उतारी, और उसकी गीली चूत को देखा। “कितनी रसीली है तेरी चूत,” उसने कहा, और अपनी जीभ से उसे चाटना शुरू किया। नेहा की कराहें कमरे में गूंजने लगीं – “आह… रोहन… हाँ… चाटो मेरी चूत को… और गहराई से!” रोहन की जीभ नेहा की क्लिट पर खेल रही थी, कभी धीरे, कभी तेज। नेहा की उंगलियां रोहन के बालों में उलझी हुई थीं, और वह अपनी कमर ऊपर उठा रही थी। “मुझे चोदो अब… अपना लंड डालो,” नेहा ने विनती की।
रोहन ने अपना पैंट उतारा। उसका लंड कड़ा और बड़ा था – नेहा की आंखें चमक उठीं। “देख, कितना बड़ा है मेरा लंड तेरे लिए,” रोहन ने कहा, और नेहा ने उसे हाथ में लिया। उसने उसे सहलाया, ऊपर-नीचे किया, और फिर मुंह में लेकर चूसना शुरू किया। “आह… नेहा… चूसो मेरे लंड को… हाँ, ऐसे ही,” रोहन ने सिसकते हुए कहा। नेहा की जीभ उसके लंड के टिप पर खेल रही थी, और वह उसे गले तक ले रही थी। रोहन की सांसें तेज हो गईं – “बस… अब मैं तुझे चोदूंगा।”
रोहन ने नेहा को पलटाया और डॉगी स्टाइल में पोजीशन लिया। उसने अपना लंड नेहा की चूत पर रगड़ा, और धीरे से अंदर डाला। “आह… कितना टाइट है तेरी चूत,” रोहन ने कहा, और धक्के मारने लगा। नेहा की चीख निकल गई – “हाँ… चोदो मुझे… जोर से चोदो!” रोहन की गति तेज हो गई, हर थ्रस्ट नेहा की चूत को गहराई से चोद रही थी। नेहा के ब्रेस्ट्स हिल रहे थे, और उसके नाखून बिस्तर की चादर में गड़ रहे थे। “और जोर से… अपना लंड और अंदर डालो,” नेहा चिल्लाई। रोहन ने उसके हिप्स पकड़े और जोर-जोर से चोदना शुरू किया। कमरा उनकी कराहों से भर गया – “आह… नेहा… तेरी चूत मुझे पागल कर रही है!” “हाँ… चोदो… मुझे चोदकर खत्म कर दो!”
अध्याय 3: जुनून की चरम सीमा
कुछ देर बाद रोहन ने नेहा को अपनी गोद में उठाया और दीवार से सटा लिया। नेहा की टांगें रोहन की कमर के चारों ओर लिपटी हुई थीं, और रोहन ने अपना लंड फिर से उसकी चूत में डाला। “अब मैं तुझे खड़े-खड़े चोदूंगा,” उसने कहा, और धक्के मारने लगा। नेहा की पीठ दीवार से रगड़ रही थी, और उसकी कराहें और तेज हो गईं – “आह… हाँ… चोदो… मेरी चूत फाड़ दो!” रोहन के हाथ उसके ब्रेस्ट्स दबा रहे थे, और वह उसे किस कर रहा था। नेहा की बॉडी में सुख की लहरें दौड़ रही थीं – वह क्लाइमैक्स के करीब थी। “मैं आ रही हूं… जोर से चोदो!” उसने चीखा, और रोहन ने गति बढ़ा दी। नेहा का शरीर कांप उठा, और वह ऑर्गेज्म पर पहुंच गई – उसकी चूत से रस बहने लगा।
लेकिन रोहन नहीं रुका। उसने नेहा को बिस्तर पर लिटाया और मिशनरी पोजीशन में आ गया। “अब मैं तेरी चूत में अपना वीर्य डालूंगा,” उसने कहा, और फिर से चोदना शुरू किया। नेहा की आंखें बंद थीं, और वह रोहन की बॉडी को महसूस कर रही थी – उसकी मसल्स, उसका पसीना, उसका लंड जो उसकी चूत को भर रहा था। “हाँ… चोदो मुझे… अपना लंड मेरी चूत में घुमाओ,” नेहा ने कहा। रोहन की गति अब और तेज थी – हर थ्रस्ट के साथ नेहा की सिसकियां बढ़ रही थीं। “आह… नेहा… तेरी चूत कितनी गर्म है!” रोहन चिल्लाया, और आखिरकार वह भी क्लाइमैक्स पर पहुंच गया। उसका गर्म वीर्य नेहा की चूत में भर गया, और दोनों एक साथ सिसकते हुए लिपट गए।
अध्याय 4: सुबह की शांति
सुबह होने तक वे एक-दूसरे की बाहों में लिपटे रहे। नेहा रोहन की छाती पर सिर रखकर लेटी थी, और रोहन उसके बालों में उंगलियां फेर रहा था। “यह रात कितनी यादगार थी,” नेहा ने कहा। “हाँ, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है,” रोहन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। उन्होंने फिर से किस किया, लेकिन इस बार नरमी से। नेहा की बॉडी अभी भी थरथरा रही थी – रात की आग ने उसे पूरी तरह संतुष्ट कर दिया था।
दिन चढ़ने लगा, और नेहा को ऑफिस जाना था। लेकिन उसकी आंखों में वही चमक थी – अगली रात की उम्मीद। रोहन ने उसे अलविदा कहा, लेकिन वादा किया, “अगली बार और ज्यादा जुनून लाऊंगा।” नेहा हंसी, “और मैं अपनी चूत तैयार रखूंगी।”