desistoryhub.com

भाभी को चोद चोद के रंडी बना दिया हिंदी सेक्स

यह बात करीब एक साल पुरानी है, जब मेरा परिवार गाँव जा रहा था। हमारी इनोवा कार में सब सवार थे। बड़े भैया ड्राइवर के बगल में आगे बैठे थे, मम्मी और पापा बीच की सीट पर थे, और मैं और भाभी जी पीछे वाली सीट पर। रात का समय था, चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था। मुझे नींद का झोंका आ रहा था और मैंने बिना कुछ सोचे भाभी की गोद में सिर रखकर आँखें मूँद लीं। उनकी साड़ी का मुलायम स्पर्श और हल्की-सी परफ्यूम की खुशबू मेरे होश उड़ा रही थी।

मैं गहरी नींद में चला गया। जब आँख खुली तो देखा भाभी नीचे की तरफ झुक कर सो रही थीं। उनकी साड़ी का पल्लू सरक गया था और उनके संतरे मेरे चेहरे के इतने करीब थे कि मैं उनके गहरे संतरों की खाई को साफ देख पा रहा था। मस्त सीन था! उनके बड़े, गोल संतरे ब्लाउज में कसकर भरे हुए थे और गोले हल्के-से उभरे हुए दिख रहे थे। मेरा औजार तुरंत खड़ा हो गया। दिल में एक अजीब-सी हलचल मच गई। मैंने हिम्मत जुटाई और धीरे से अपना मुँह उनके संतरों के पास ले गया। पहले तो हल्के से होठों से छुआ, फिर जब भाभी की कोई हलचल नहीं हुई तो मैंने उनके गोटों को ब्लाउज के ऊपर से ही हल्के से दबाया। क्या सख्त और रसीले संतरे थे! मैंने धीरे-धीरे चूसना शुरू किया, जैसे कोई बच्चा पीता है।

अचानक भाभी की आँख खुल गई। मैं डर के मारे तुरंत सोने की एक्टिंग करने लगा, आँखें बंद करके साँस रोक ली। भाभी ने कुछ नहीं कहा, लेकिन मैंने महसूस किया कि उन्होंने अपना सीना थोड़ा और ऊपर उठा लिया, जैसे मुझे और मौका दे रही हों। मैं वैसे ही उनकी गोद में लेटा रहा, दिल धक-धक कर रहा था। क्या भाभी को भी मज़ा आ रहा था? यह सवाल मेरे दिमाग में घूम रहा था।

सुबह हम गाँव पहुँच गए। दिन भर घर में रिश्तेदारों से मिलना-जुलना चलता रहा, लेकिन मेरा दिमाग बार-बार रात के उस सीन पर अटक रहा था। भाभी के नुकीले संतरों का ख्याल आते ही मेरा औजार तन जाता। मैंने दिन में तीन-चार बार बाथरूम में जाकर हिलाया। शाम को भैया और पापा को किसी जमीन के

भी को अपने कमरे की तरफ आते देख मेरे दिल की धड़कन फिर से बढ़ गई। मैं बिस्तर पर लेटा था लेकिन नींद कोसों दूर थी। रात गहरी हो चुकी थी, भाभी मेरे बगल में आकर लेट गईं। उनकी साँसों की हल्की-सी आवाज मुझे और बेकरार कर रही थी। मैंने हिम्मत जुटाई और धीरे से अपना हाथ उनके संतरों पर रख दिया। फिर मैंने उनकी साड़ी के ऊपर से ही उनकी खाई को सहलाया, क्या मक्खन जैसी मुलायम खाई थी! मैंने धीरे-धीरे उनकी साड़ी के अंदर हाथ डाला और उनकी चिकनी खाई को सहलाने लगा।

अचानक भाभी जाग गईं और मुझे देख लिया। मेरा हाथ उनकी खाई पर था और मैं पकड़ा गया। मैंने झट से हाथ खींच लिया और डर के मारे “सॉरी-सॉरी” बोलने लगा। भाभी ने गुस्से में कहा, “यह क्या कर रहे थे? मैं तेरी भाभी हूँ, कोई गर्लफ्रेंड नहीं। रुक, मैं अभी सबको बताती हूँ।”

मैं डर के मारे काँपने लगा, “भाभी, प्लीज़ ऐसा मत करो। मैं आज के बाद कभी नहीं करूँगा, आई ऍम रियली सॉरी।”

कुछ देर तक भाभी चुप रहीं, फिर उनका गुस्सा थोड़ा ठंडा हुआ और वो बोलीं, “अक्की, तू मेरे साथ यह सब क्यों कर रहा था?”

मैंने हिम्मत करके सच बोल दिया, “भाभी, आप मुझे बहुत पसंद हो। आपका फिगर, आपकी बातें, सब कुछ अलग है। कल कार में जब मैंने आपके संतरों को चूसा, आपने कुछ नहीं कहा तो मुझे लगा शायद आपको भी बुरा नहीं लगा। इसीलिए आज मेरी हिम्मत बढ़ गई।”

भाभी हल्के से हँस पड़ीं और बोलीं, “अच्छा! तो तू मुझे इतना पसंद करता है।”

मैंने कहा, “हाँ भाभी, आप तो मेरे सपनों की रानी हो।” तभी भाभी ने अपना हाथ मेरे औजार पर रख दिया और स्माइल दे दी। मेरे लिए यह ग्रीन सिग्नल था।

मैंने तुरंत भाभी को बिस्तर पर लिटाया और उनके होठों पर अपने होंठ रख दिए। उनके रसीले होंठ चूमते हुए मेरा औजार और कड़क हो गया। मैंने अपनी जीभ उनके मुँह में डाल दी और हमारी जीभ आपस में लड़ने लगी। फिर मैं नीचे की तरफ बढ़ा, उनके गले को चूमने लगा। मैंने उनकी साड़ी खींच कर उतार दी। अब वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थीं। मैंने उनका ब्लाउज खोल दिया और उनकी ब्रा में कैद बड़े-बड़े संतरे मेरे सामने थे। मैंने ब्रा भी उतार दी और उनके सुडौल, गोल और रसीले संतरों को देखकर मेरा औजार और तन गया। मैंने उनके गोटों को मुँह में लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा।

फिर मैंने उनका पेटीकोट भी खोल दिया। अब भाभी सिर्फ पैंटी में थीं, उनकी गुफा पैंटी के ऊपर से ही गीली दिख रही थी। भाभी बोलीं, “अक्की, तू भी अपने कपड़े उतार दे।” मैंने कहा, “भाभी, आप ही उतार दो।” उन्होंने मुझे धक्का देकर लिटा दिया और ऊपर चढ़ गईं। पहले उन्होंने मुझे गहरा किस किया, फिर मेरी शर्ट और पैंट उतार दी। जब उन्होंने मेरा कच्छा खींचा तो मेरा सात इंच का औजार बाहर आया, एकदम तना हुआ। भाभी उसे देखकर बोलीं, “हाय अक्की! तेरा औजार तो इतना बड़ा और मोटा है। तेरे भैया का तो छोटा और पतला है और उसमें ताकत भी नहीं है।”

मैंने जोश में कहा, “भाभी, आज मैं आपकी सारी प्यास बुझा दूँगा।”

भाभी ने पागलों की तरह मेरे औजार को चूमना शुरू किया। वो उसे हाथ में लेकर सहलाने लगीं और फिर उसे मुँह में ले लिया। उनकी जीभ मेरे औजार के टोपे पर चक्कर काट रही थी। मैं आसमान में उड़ रहा था। फिर मैंने भाभी को नीचे लिटाया और उनकी पैंटी उतार दी। उनकी गुफा एकदम चिकनी और पिंक थी। मैंने पहले उनकी गुफा को हाथ से सहलाया, फिर जीभ से चूसना शुरू किया। जैसे ही मेरी जीभ उनकी गुफा के दाने को छुई, भाभी की आवाजें तेज हो गईं। कुछ ही देर में भाभी ने पानी छोड़ दिया। मैंने सारा रस पी लिया।

भाभी चिल्लाईं, “अक्की, अब बस कर, अपना औजार डाल दे, मुझे और मत तड़पा!”

मैंने भाभी की टाँगें फैलाईं। उनकी गुफा एकदम गीली और लपलपा रही थी। मैंने अपने औजार को उनकी गुफा के छेद पर सेट किया और एक जोरदार धक्का मारा। मेरा आधा औजार उनकी गुफा में घुस गया। भाभी ज़ोर से चीखीं। मैंने दूसरा धक्का और ज़ोर से मारा और मेरा पूरा औजार उनकी गुफा में समा गया। भाभी की आँखों से आँसू निकल आए, “मार दिया! मेरी गुफा फाड़ दी, धीरे कर!”

मैं समझ गया कि भैया का औजार छोटा था, तो भाभी की गुफा को इतने बड़े औजार की आदत नहीं थी। यह सुनकर मैं और जोश में आ गया, “अभी तो शुरुआत है, आज तेरी गुफा की खाई बना दूँगा!” मैंने कहा और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा।

भाभी की चीखें अब सिसकारियों में बदल गई थीं, “खोद दे मेरी गुफा को… फाड़ दे!” वो चिल्ला रही थीं। उनकी गुफा इतनी गीली थी कि मेरा औजार सटासट अंदर-बाहर हो रहा था। 20 मिनट की ताबड़तोड़ खुदाई के बाद भाभी ने फिर से पानी छोड़ दिया। मैं और तेजी से खोदने लगा। आधे घंटे की खुदाई के बाद मेरा पानी भी निकल गया। मैंने सारा माल उनकी गुफा में ही डाल दिया।

भाभी संतुष्ट होकर हाँफ रही थीं। वह बोलीं, “अक्की, तूने तो मेरी सारी प्यास बुझा दी, तेरे भैया से यह कभी नहीं हुआ।”

उस रात मैंने भाभी को तीन बार खोदा, हर बार उनकी गुफा को नए तरीके से रगड़ा। आखिरी बार तो मैंने उन्हें घोड़ी बनाकर खोदा। हम दोनों ऐसे ही एक-दूसरे की बाहों में सो गए। सुबह भाभी ने मुझे होठों पर किस करके जगाया। मैंने उन्हें बाहों में भर लिया, “भाभी, एक बार और?”

भाभी हँसकर बोलीं, “रात को मेरे राजा, अभी मम्मी जाग जाएँगी।” वो मेरी बाहों से निकलकर भाग गईं। अब भाभी मेरी माल बन चुकी हैं। जब भी मौका मिलता है, मैं उनकी गुफा की खाई बना देता हूँ।

Leave a Comment