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स्कूल की क्रश को collage में चोदा

हाय दोस्तों, मैं हूँ रोहन और आज मैं आपको अपनी ज़िंदगी की वो कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो हर लड़के के दिल में कहीं न कहीं दबी होती है—स्कूल वाले पहले प्यार की कहानी।

बात तब की है जब मैं 12वीं क्लास में था। मैं था क्लास का बैकबेंचर, मस्त-मौला, जिसे पढ़ाई से ज़्यादा दोस्तों और खिड़की के बाहर की दुनिया में मज़ा आता था। और हमारी क्लास की फ़र्स्ट बेंचर थी—इशिता। वो सिर्फ़ टीचर की फ़ेवरेट नहीं थी, बल्कि पूरी क्लास के लड़कों के दिलों की धड़कन थी। उसकी मासूम-सी मुस्कान, हवा में उड़ते उसके रेशमी बाल, और जब वो जवाब देने के लिए खड़ी होती तो उसकी आँखों में एक अलग ही चमक होती थी। मैं तो बस उसे देखकर ही खो जाता था।

मेरा पूरा साल उसे छुप-छुपकर देखने, उसकी हर छोटी-बड़ी बात पर मुस्कुराने और इस उम्मीद में निकल गया कि कभी तो वो मेरी तरफ़ भी देखेगी। पर कहाँ वो टॉपर और कहाँ मैं एवरेज स्टूडेंट। हमारी दुनियाएँ बिल्कुल अलग थीं। स्कूल का आख़िरी दिन आया, सब एक-दूसरे से गले मिल रहे थे, प्रॉमिसेज़ कर रहे थे, लेकिन मैं बस दूर खड़ा उसे देख रहा था। हिम्मत ही नहीं हुई कि जाकर उससे बात करूँ।

किस्मत का दूसरा मौका

स्कूल ख़त्म हुआ, हम सब अपनी-अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ गए। तीन साल गुज़र गए। मैं दिल्ली में कॉलेज कर रहा था। एक दिन मैं और मेरे दोस्त एक कैफ़े में बैठे थे, तभी मेरी नज़र सामने वाली टेबल पर पड़ी। वही चेहरा, वही मुस्कान, वही आँखें—वो इशिता थी। एक पल के लिए तो मेरा दिल धड़कना ही भूल गया। वो पहले से भी ज़्यादा ख़ूबसूरत लग रही थी। जीन्स और टॉप में उसका कसा हुआ बदन और मेच्योर लुक मुझे पागल कर रहा था।

इस बार मैंने मौक़ा गँवाने का फ़ैसला नहीं किया। मैंने गहरी साँस ली और उसकी टेबल की तरफ़ बढ़ गया। “इशिता? तुम… पहचान… मैं रोहन, तुम्हारे साथ 12वीं में था।” उसने एक पल मुझे देखा और फिर उसकी आँखों में पहचान की चमक आ गई। “ओह माय गॉड! रोहन! तुम! कैसे हो? यहाँ कैसे?” उस दिन हमारी ख़ूब बातें हुईं। पता चला कि वो भी दिल्ली में ही पढ़ रही थी। हमने नंबर एक्सचेंज किए और यहीं से हमारी दोस्ती की एक नई शुरुआत हुई।

दोस्ती से प्यार तक का सफ़र

अब हम अक्सर मिलने लगे। कॉफ़ी, मूवीज़, कॉलेज फेस्ट। मैं उसे अपने दिल की बात बताना चाहता था, लेकिन डरता था कि कहीं हमारी दोस्ती भी न टूट जाए। पर जैसे-जैसे हम वक़्त बिता रहे थे, मुझे महसूस हो रहा था कि वो भी मुझे पसंद करती है। वो मेरे जोक्स पर सबसे ज़्यादा हँसती, मेरी हर छोटी बात ध्यान से सुनती।

एक शाम हम इंडिया गेट पर घूम रहे थे। मौसम बहुत हसीन था। मैंने उसका हाथ पकड़ा। उसने मेरा हाथ छुड़ाया नहीं, बल्कि और कसकर पकड़ लिया। बस, मुझे मेरा जवाब मिल गया। मैंने कहा, “इशिता, मैं स्कूल टाइम से तुम्हें पसंद करता हूँ।” वो मुस्कुराई और बोली, “मुझे पता है, बुद्धू। और मैं भी।” उस पल की ख़ुशी मैं शब्दों में बयाँ नहीं कर सकता। मैंने उसे अपनी ओर खींचा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो हमारा पहला किस था—बहुत नर्म और प्यार भरा।

वो रात, जब सब कुछ बदल गया

उस दिन के बाद हम रिलेशनशिप में आ गए। कुछ हफ़्ते बाद मेरा जन्मदिन था। मेरे फ़्लैटमेट्स वीकेंड पर घर गए हुए थे और फ़्लैट पर मैं अकेला था। मैंने इशिता को डिनर पर बुलाया।

वो एक सुंदर-सी लाल ड्रेस पहनकर आई। वो इतनी हॉट लग रही थी कि मेरी नज़रें उस पर से हट ही नहीं रही थीं। हमने साथ में डिनर किया, केक काटा और फिर बालकनी में बैठकर बातें करने लगे। माहौल बहुत रोमांटिक था।

मैंने पीछे से उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसकी गर्दन पर किस करने लगा। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। वो मेरी तरफ़ पलटी और हम एक-दूसरे को पागलों की तरह चूमने लगे। मेरे हाथ उसकी कमर और पीठ पर फिसल रहे थे।

“रोहन…” उसने धीरे से फुसफुसाया। मैं उसे गोद में उठाकर बेडरूम में ले आया। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी ड्रेस की ज़िप खोल दी। लाल ड्रेस के नीचे काले रंग की लॉन्जरी में वो क़हर ढा रही थी। मैंने एक-एक करके उसके कपड़े उतारे और वो भी मेरा साथ दे रही थी। कुछ ही पलों में हम दोनों बिना कपड़ों के एक-दूसरे के सामने थे।

मैं उसके ऊपर आया और उसके गुलाबी निपल्स को अपने मुँह में भर लिया। वो सिहर उठी। मैं उसके पूरे बदन को चूम रहा था, चूस रहा था। वो पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी। उसकी गुफ़ा से रस टपक रहा था।

वो बोली, “अब और इंतज़ार नहीं होता, रोहन। प्लीज़…”

मैं उसकी टाँगों के बीच आया और अपने औज़ार को उसकी गीली खाई के मुँह पर सेट किया। मैंने उसकी आँखों में देखा, एक इजाज़त माँगी। उसने पलकें झुकाकर हाँ कह दिया।

मैंने धीरे से एक धक्का मारा। वो पहली बार था, इसलिए वो थोड़ा दर्द से चीखी, “आह्ह…” मैं रुक गया। मैंने उसके माथे को चूमा और कहा, “बस थोड़ा सा…” फिर मैंने एक ही बार में अपना पूरा औज़ार उसकी तंग गुफ़ा में उतार दिया। उसकी आँखों से आँसू निकल आए, लेकिन कुछ ही पलों में दर्द की जगह मज़े ने ले ली। वो अपनी कमर हिलाकर मेरा साथ देने लगी।

मैं धीरे-धीरे उसे चोद रहा था। कमरे में बस हमारी सिसकारियाँ और ‘थप-थप’ की आवाज़ गूँज रही थी। वो पल मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा था। मेरी सालों की चाहत, मेरा स्कूल का क्रश, आज पूरी तरह से मेरी थी।

लगभग 20 मिनट तक उसे चोदने के बाद मैं भी अपने चरम पर था। मैंने आख़िरी कुछ धक्के ज़ोर से मारे और अपना सारा लावा उसकी बच्चेदानी में छोड़ दिया। हम दोनों थककर एक-दूसरे की बाहों में सो गए।

उस रात के बाद हमारा रिश्ता और भी गहरा हो गया। वो सिर्फ़ मेरा प्यार नहीं, मेरी ज़िंदगी बन गई थी। आख़िरी बेंच पर बैठकर देखा गया एक सपना आज हक़ीक़त बन चुका था।

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