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चचेर भाईओ ने मुझे बगीचे में जमकर चोदा

लो दोस्तों, कैसे हो? यह कहानी मेरे और मेरे दो चचेरे भाइयों के बारे में है, जिन्होंने गाँव के पोखर में मेरी जमकर ठुकाई की। मेरे ताऊजी गाँव में रहते हैं, तो मैं गर्मी की छुट्टियों में उनके घर गई थी। इस कहानी में मेरे अलावा दो लोग हैं: अनिकेत भैया (उम्र 23 वर्ष) और अमित भैया (उम्र 21 वर्ष)।

यह बात साल 2023 की है। जून का महीना था और छुट्टियाँ चल रही थीं। ऐसे में मेरा मन पूसा में रहने वाले अपने ताऊजी के यहाँ जाने का हुआ क्योंकि वहाँ पूरा गाँव का माहौल है, खेत हैं और आम-लीची के बगीचों की भरमार है। मेरे कहने पर पापा ने मुझे वहाँ पहुँचा दिया। उस दिन ताऊजी, ताईजी और दोनों भैया से मेरी खूब बातें हुईं। शाम को दोनों भैया और मैं खेत में घूमने गए, जहाँ से मैंने कुछ आम तोड़े। इसके बाद अनिकेत भैया ने मुझे पोखर भी दिखाया। उन्होंने बताया कि इसको ताऊजी ने मछली पालने के लिए बनवाया था, पर अब ऐसे ही पड़ा हुआ है। वह पोखर छोटा-सा ही था और उसमें उतरने-चढ़ने के लिए पक्की सीढ़ियाँ थीं। पानी एक दम साफ था। भैया ने बताया कि गर्मी में इसमें नहाने में बड़ा मज़ा आता है।

ऐसे ही कुछ दिन बीत गए। एक दिन दोनों भैया पोखर में नहाने के लिए जा रहे थे, तो मैं भी उनके साथ हो ली। अनिकेत भैया ने कहा, “तुम भी उस पोखर में नहा कर देखो, बहुत मज़ा आएगा।” पहले तो मुझे कुछ हिचकिचाहट हुई, पर फिर मैं मान गई। मैंने भी अपने कपड़े और तौलिया ले लिया और भैया के साथ पोखर की तरफ चल दी। वहाँ पहुँचकर दोनों भैया ने अपने कपड़े उतारे और चड्डी में आ गए। मैं भी उनके साथ कपड़ों में ही पोखर में नहाने को चली आई। उसमें नहाने में बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने तय किया कि अब मैं रोज़ यहीं आकर नहाऊँगी।

कुछ दिनों तक ऐसे ही चलता रहा। एक दिन जब हम सब नहाने को निकले, तब अमित भैया ने मुझसे कहा, “क्या सौम्या? तुम जो वहाँ पूरे कपड़े पहन कर नहाती हो तो उसमें उतना मज़ा नहीं आता होगा।” इस पर अनिकेत भैया ने भी हाँ में हाँ मिलाई।

तब मैं बोली, “तो मैं क्या करूँ?”

इस पर अनिकेत भैया बोले, “तुम भी हमारे जैसे होकर नहाओ, ज्यादा अच्छा लगेगा।”

तब अमित भैया ने पूछा, “तुम अंदर में क्या पहनती हो?”

मैंने कुछ झिझकते हुए बोला, “ऊपर में टॉप और नीचे में पैंटी पहनती हूँ।” इस पर भैया बोले, “ब्रा नहीं पहनती हो क्या?”

तब मैंने बताया, “नहीं भैया, अभी मेरा ऊपर छोटा है तो ब्रा की जरूरत नहीं पड़ती है।” भैया ने कहा, “ठीक है, तो तुम पैंटी और टॉप में भी तो नहा सकती हो, इस तरह से तुम्हारा शरीर भी अच्छे से साफ हो पाएगा।” मैंने कहा, “ठीक है भैया, वैसा ही करूँगी।”

जिसके बाद हम तीनों पोखर की तरफ नहाने को आ गए। वहाँ पहुँचकर भैया दोनों चड्डी में आ गए। मुझे थोड़ी झिझक हो रही थी। इस पर अनिकेत भैया ने बोला, “सौम्या, अगर तुमको मन नहीं है तो जैसा ठीक लगता है, वैसी ही नहाओ।” तब मैंने कहा, “नहीं भैया, ऐसी बात नहीं है।” उसके बाद मैंने पहले अपनी कुर्ती उतारी, उसके बाद सलवार उतार कर मैं पैंटी और टॉप में आ गई। इस पर अमित भैया बोले, “देखो, अब कितनी अच्छी दिख रही हो, चलो अब नहाने।”

वैसे ही दो-चार दिन निकल गए। फिर एक दिन हम तीनों नहाने पोखर में आए, तब अनिकेत भैया ने बोला, “सौम्या, जब तुम्हारा ऊपर वाला संतरा छोटा-सा ही है, तो फिर तुम ये टॉप पहन कर क्यों नहाती हो? देखो, हम लोग कैसे बस चड्डी में ही नहाते हैं।” उसके बाद अनिकेत भैया ने बोला, “लाओ, खोल दो इस टॉप को।” तब मैं बोली, “जैसा आप दोनों को ठीक लगे।” उसके बाद अनिकेत भैया ने मेरे टॉप को खोल दिया और मेरे दो छोटे-छोटे संतरों को दोनों भैया ने देख लिया।

इसके बाद हम सब नहाने पोखर में आ गए। अनिकेत भैया ने मुझे गोद में उठा लिया और मेरे साथ मस्ती करने लगे। वे मेरे बदन को छूने लगे और मेरे संतरे को दबाने लगे। इस पर मैं बोली, “ये क्या कर रहे हो भैया?” तब भैया ने बोला, “सौम्या, थोड़ी मस्ती कर लेने दो ना।” इस पर मैंने कुछ नहीं बोला। उसके बाद अमित भैया ने मेरी पैंटी को भी झट से उतार दिया, जिससे मैं अब दोनों भैया के सामने पूरी तरह से बिना कपड़ों की हो गई और वो दोनों मेरे नंगे बदन के साथ खेलने लगे। अमित भैया मेरी गुफा के साथ खेल रहे थे और अनिकेत भैया मेरे संतरे के साथ। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

इसके बाद अमित भैया ने अपनी चड्डी उतार दी और मुझे अपनी गोद में लेकर मेरी गुफा पर अपना औजार फेरने लगे। जिस पर मैं गर्म होने लगी और भैया ने मेरी सहमति भाँप ली। उसके बाद धीरे-धीरे अमित भैया ने अपने औजार को मेरी गुफा के कुएँ में डालना शुरू कर दिया। देखते-देखते उनका मोटा औजार मेरी गुफा के अंदर जा चुका था, जिसको वे मेरी गुफा में अंदर-बाहर करने लगे थे। शुरुआत में मुझे कुछ दर्द हुआ पर कुछ देर बाद मेरी गुफा गीली हो गई और अब मुझे ठुकाई में पूरा मज़ा आने लगा। मेरे मुँह से आह… ऊह… जैसी आवाजें निकलने लगीं, जिसके बाद भैया मुझे और ज़ोर-ज़ोर से खोदने लगे। कुछ देर बाद भैया ने अपने औजार का पानी मेरी गुफा के बाहर गिरा दिया।

उसके बाद अनिकेत भैया की बारी थी। अब उन्होंने अपनी चड्डी उतारी और मेरी गुलाबी गुफा में अपने औजार को एक झटके में डाल दिया, जिससे मैं दर्द से कराह उठी। उसके बाद उन्होंने मुझे कसकर खोदना शुरू कर दिया। करीब 10 मिनट तक खोदने के बाद मैं और भैया, दोनों झड़ गए। उसके बाद अनिकेत भैया ने भी अपने औजार का पानी मेरी गुफा के बाहर गिरा दिया। उस दिन पोखर वाली ठुकाई खत्म हुई।

रात को खाने के बाद, अनिकेत भैया ने ताऊजी से कहा, “आज रात को सौम्या को छत पर सुलाते हैं, उसको अच्छा लगेगा।” अंकल मान गए और बोले, “पर उसको अकेले मत सोने देना, तुम लोग भी अपना बिस्तर ऊपर लगा लो।” फिर दोनों भैया ने मिलकर छत पर बिस्तर तैयार कर दिया। बिस्तर पर लेट कर दोनों भैया ने मेरे साथ सुबह वाली ठुकाई पर बातें कीं और फिर से मस्ती करने लगे। देखते-देखते दोनों ने मिलकर मुझे फिर से पूरी तरह से नंगा कर दिया और खुद भी नंगे हो गए।

उसके बाद अनिकेत भैया मेरे होठों को चूमने लगे और अमित भैया मेरी गुफा पर ऊँगली फेरने लगे। फिर अमित भैया ने अपने औजार को मेरी गुफा में सीधा डाल दिया और मेरी ठुकाई करने लगे। जब अमित भैया मुझे खोदकर झड़ गए, तब अनिकेत भैया ने वैसे ही मुझे खोदना शुरू कर दिया। अनिकेत भैया का औजार कुछ ज्यादा ही बड़ा था, तो उनसे खुदवाने में मुझे ज्यादा मज़ा आ रहा था। करीब 15 मिनट तक खोदने के बाद मैं और अनिकेत भैया, दोनों झड़ गए।

फिर हम तीनों कुछ देर तक वैसे ही लेटे रहे। उसके बाद अमित भैया मेरे नीचे आ गए और मेरे गोले की गुफा में अपने औजार को डालने लगे। पर गुफा छोटी होने की वजह से उनका औजार उसमें नहीं जा रहा था। तब उन्होंने मेरे गोले में नारियल का तेल चुपड़ दिया। वे तेल पहले से ही अपने साथ लाए थे, जिसके बाद उनका औजार कुछ ही कोशिश के बाद मेरे गोले की गुफा में चला गया। मैं दर्द से चीख उठी। इस पर अनिकेत भैया ने मेरा मुँह अपने होठों से लगाकर बंद कर दिया और वे मेरे होठों का रस पीने लगे। धीरे-धीरे मुझे अब कुछ अच्छा लगने लगा, तभी अनिकेत भैया ने अपना औजार मेरी गुफा के कुएँ में डाल दिया और मुझे खोदने लग गए। अब मेरे दोनों छेदों में दोनों भैया अपना औजार डालकर मुझे एक साथ खोद रहे थे और मैं चीख रही थी। कुछ देर बाद जब हम सभी झड़ गए, तब सब वैसे ही लेटे रहे।

अगले दिन, अमित भैया बोले, “सौम्या, चलो आज कुछ अलग करते हैं।” वे दोनों मुझे बगीचे में लेकर आ गए और बोले, “यहाँ हम तुम्हारा कुछ फोटो शूट करेंगे।” इस पर भी मैं तैयार हो गई। उसके बाद उन्होंने मुझसे एक-एक करके सारे कपड़े उतरवा दिए और मेरे नंगे बदन की अलग-अलग पोज में तस्वीरें लीं। उन्होंने मेरी गुफा को फैलाकर भी फोटो खींची। मैंने पूछा, “भैया, इन सब फोटो का आप क्या करोगे?” भैया ने बताया, “जब तुम चली जाओगी, तब हम दोनों तुम्हारी इन्हीं फोटो सब को देखकर हिलाएँगे।” मैं बोली, “ठीक है भैया, पर ये सब फोटो ठीक से रखिएगा, कोई देखे ना?” इस पर उन्होंने कहा, “हम इसको लॉक लगाकर संभाल कर रखेंगे।”

मैं जब तक वहाँ रही, रोज़ मेरी ठुकाई होती रही और मुझे अपनी ठुकाई करवाने में मज़ा भी आता था। उसके बाद कुछ दिन में ही मैं वहाँ से वापस समस्तीपुर अपने घर आ गई, जिससे भैया से मेरी ठुकाई का यह सिलसिला थम गया।

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