desistoryhub.com

तेल लगा कर भाभी की चुत मरी सेक्स स्टोरी

मेरा नाम नीरज है और आज मैं आपको अपनी देवरानी, यानी मेरी भाभी रिया के साथ की एक रात के बारे में बताऊंगा। भाई की शादी को अभी सिर्फ छह महीने ही हुए थे, और वो अपने बिज़नेस ट्रिप पर बाहर गया हुआ था। घर में सिर्फ मैं और मेरी भाभी रिया थे। रिया… उसकी बात ही कुछ और थी। छोटी कुर्ती में उसकी जांघें और उसके भरे हुए संतरे हमेशा ही मेरा ध्यान खींच लेते थे।

उस रात मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था कि अचानक रिया का मैसेज आया, “नीरज, क्या तुम मेरे कमरे में आ सकते हो? मुझे थोड़ी मदद चाहिए।”

मैं तुरंत उठा और उसके कमरे की ओर चल पड़ा। दरवाज़ा खुला था। अंदर जाते ही मेरी सांस रुक गई। रिया बेड पर लेटी हुई थी और उसने एक टी-शर्ट पहन रखी थी, जो शायद मेरे भाई की थी। वो बहुत छोटी थी, और उसके नीचे से उसकी पूरी जांघें और उसके काले अंडरवियर का किनारा साफ़ दिख रहा था।

“क्या हुआ भाभी?” मैंने पूछा, अपनी नज़रें उससे हटाते हुए।

“मेरी पीठ में बहुत दर्द है,” उसने कराहते हुए कहा, “कोई तेल है? थोड़ा मालिश कर दो ना।”

मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा। मैं तेल लेकर आया। रिया ने करवट ली और अपनी टी-शर्ट थोड़ी और ऊपर कर ली। अब उसकी पूरी पीठ और उसके अंडरवियर का पूरा नज़ारा मेरे सामने था।

मैंने हाथ में तेल लिया और उसकी पीठ पर रखा। मेरे हाथ कांप रहे थे। मैंने हल्के से मसाज शुरू किया। उसकी त्वचा बहुत मुलायम थी।

“जोर से दबाओ ना,” उसने कहा, “डर किस बात का है?”

मैंने ज़ोर लगाया। मेरी उंगलियां उसके शरीर पर नाचने लगीं। थोड़ी देर में ही उसकी सांसें तेज हो गईं। अचानक उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने स्तन पर रख दिया।

“यहाँ भी दर्द है,” उसने फुसफुसाया।

मैं स्तब्ध रह गया। मेरा हाथ उसके नर्म और भरे हुए स्तन पर था। मैंने हल्के से मसाज करना शुरू किया। उसने आंखें बंद कर लीं और कराह उठी, “हाँ… ऐसे ही…”

उसने मेरा दूसरा हाथ पकड़ा और अपनी जांघों के बीच ले जाकर रख दिया। “यहाँ सबसे ज़्यादा दर्द है नीरज,” उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक अलग ही गर्मी थी।

मैं अब खुद को रोक नहीं पा रहा था। मैंने झुककर उसके होठों को चूम लिया। वो तुरंत प्रतिक्रिया देने लगी। उसने मेरी जीभ को अपने मुंह में खींच लिया।

उसने मेरी शर्ट उतार दी और फिर अपनी टी-शर्ट उतारकर फेंक दी। अब वो सिर्फ अपने काले अंडरवियर में थी। उसके भरे हुए स्तन मेरे सामने थे। मैंने उन्हें चूसना शुरू कर दिया। वो जोर-जोर से चिल्लाने लगी, “ओह हाँ! ऐसे ही! अपनी भाभी के संतरे चूसो!”

फिर उसने अपना panty भी उतार दिया। उसकी गीली और काली गुफा मेरे सामने थी। मैंने अपनी उंगलियां उसमें डाल दीं। वो और भी जोर से चिल्लाई, “और अंदर! अपनी उंगलियां अपनी भाभी की गुफा में और अंदर डालो!”

थोड़ी देर उंगलियां चलाने के बाद, मैंने अपना औज़ार बाहर निकाला। वो देखते ही उसकी आंखें चौंधिया गईं। “कितना बड़ा और मोटा है तुम्हारा हथियार,” उसने कहा।

उसने मुझे पीछे धकेला और खुद ऊपर आ गई। उसने मेरे औज़ार को अपनी गुफा के दरवाजे पर रखा और फिर धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी। “आह! ओह!” वो चिल्लाई जैसे ही वो पूरी तरह से नीचे बैठी।

उसने ऊपर-नीचे होना शुरू किया। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें मसलना शुरू कर दिया।

“चुदो मुझे नीरज! अपनी भाभी को चुदो!” वो चीख़ रही थी।

मैंने उसे पलटा और उस पर चढ़ गया। मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। मेरा औज़ार उसकी गुफा को चीरता हुआ अंदर जा रहा था। पच-पच की आवाज़ आ रही थी।

“और तेज़! और गहरे!” वो गिड़गिड़ा रही थी।

मैंने उसकी टांगें अपने कंधों पर रख लीं और और भी तेज़ी से धक्के मारने लगा। वो जोर-जोर से चिल्ला रही थी, “हाँ! हाँ! ऐसे ही! अपनी भाभी की चूत मारो!”

थोड़ी देर में मुझे लगा कि मैं निकलने वाला हूं। “मैं निकलने वाला हूं भाभी!” मैंने चीख़ कर कहा।

“अंदर निकालो!” उसने जवाब दिया, “अपना सारा माल अपनी भाभी की गुफा में ही निकालो!”

मैंने एक जोरदार धक्का मारा और अपना गाढ़ा वीर्य उसकी गुफा की गहराई में उड़ेल दिया। वो भी एक जोरदार झटके के साथ झड़ गई। उसकी गुफा से पानी निकलकर बिस्तर पर फैल गया।

हम दोनों हांफते हुए बिस्तर पर गिर पड़े। उसने मेरे होठों को चूमा और कहा, “तुम्हारा भाई मुझे कभी ऐसा मज़ा नहीं दे पाया।”

उस रात के बाद, जब भी मेरा भाई बाहर जाता है, रिया मेरे कमरे में आ जाती है। और हम पूरी रात एक-दूसरे की गुफाओं की खुदाई में लगे रहते हैं। आखिरकार, भाभी की सेवा करना तो अपने देवर का फर्ज़ बनता है ना?

Leave a Comment