19-20 साल की होगी, तीखी नाक, नशीली आँखें और गुलाबी होंठ। उसकी बॉडी भी एकदम कसी हुई थी, टी-शर्ट में से उसके सेब जैसे उभार साफ़ दिख रहे थे। उसे देखते ही मेरा दिल फिसल गया और पैंट में मेरा औज़ार सलामी देने लगा। मैंने ठान लिया, इस लड़की को तो पटाना ही है।
हाय दोस्तों, मेरा नाम आर्यन है और मैं 21 साल का एक कॉलेज स्टूडेंट हूँ। मेरी ज़िंदगी काफी बोरिंग चल रही थी, दिनभर पढ़ाई और दोस्तों के साथ थोड़ी-बहुत मस्ती। लेकिन फिर मेरी ज़िंदगी में एक तूफ़ान आया, जिसका नाम था रिया।
बात कुछ महीने पहले की है। मेरे घर के सामने वाला फ्लैट काफी समय से खाली था, फिर एक दिन वहाँ एक नया परिवार रहने आया। उसी शाम मैंने उसे पहली बार देखा—रिया। वो अपनी बालकनी में खड़ी थी, गीले बालों को तौलिये से सुखा रही थी। क्या क़यामत लग रही थी! 19-20 साल की होगी, तीखी नाक, नशीली आँखें और गुलाबी होंठ। उसकी बॉडी भी एकदम कसी हुई थी, टी-शर्ट में से उसके सेब जैसे उभार साफ़ दिख रहे थे। उसे देखते ही मेरा दिल फिसल गया और पैंट में मेरा औज़ार सलामी देने लगा। मैंने ठान लिया, इस लड़की को तो पटाना ही है।
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इम्प्रेस करने का सिलसिला
अब हर शाम मैं अपनी बालकनी में आकर बैठ जाता, बस उसकी एक झलक पाने के लिए। शुरू में तो वो मुझे नज़रअंदाज़ करती रही, लेकिन धीरे-धीरे हमारी नज़रें मिलने लगीं। एक दिन मैंने हिम्मत करके उसे देखकर मुस्कुराया, और हैरानी की बात ये थी कि वो भी हल्का-सा मुस्कुरा दी। बस, मुझे मेरा ग्रीन सिग्नल मिल गया।
मैंने पता लगाया कि उसे म्यूज़िक का बहुत शौक है। एक शाम जब वो अपनी बालकनी में गाने सुन रही थी, तो मैंने भी अपने स्पीकर पर वही गाना बजा दिया। उसने चौंककर मेरी तरफ देखा और हँस दी। यहीं से हमारी बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। पहले बालकनी से इशारों में, फिर व्हाट्सएप पर चैटिंग शुरू हो गई।
वो बहुत चुलबुली और बातूनी थी। हम रात-रात भर बातें करते। मैंने उसे बताया कि मैं कॉलेज के असाइनमेंट में उसकी मदद कर सकता हूँ। इसी बहाने हमारा मिलना-जुलना शुरू हो गया। मैं अक्सर उसके घर जाने लगा। हम साथ में पढ़ते, हँसते-मज़ाक करते। मैं उसकी तारीफ़ करने का कोई मौका नहीं छोड़ता था। कभी उसकी ड्रेस की, तो कभी उसकी मुस्कान की। वो शरमा जाती, जिससे वो और भी ज़्यादा क्यूट लगती थी।
वो हसीन शाम
एक दिन रिया ने बताया कि उसके मम्मी-पापा किसी शादी में शहर से बाहर जा रहे हैं और वो घर पर अकेली है। मेरे शैतानी दिमाग की बत्ती जल गई। मैंने मज़ाक में कहा, “अकेले डर नहीं लगेगा?” वो हँसकर बोली, “तुम हो न, प्रोटेक्शन के लिए।”
बस, इसी बात पर मैंने मौके पर चौका मार दिया। मैंने कहा, “चलो, आज रात साथ में मूवी देखते हैं। पिज़्ज़ा भी ऑर्डर कर लेंगे।” वो तुरंत मान गई।
रात को मैं उसके घर पहुँचा। उसने एक ढीली-ढाली टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने हुए थे, जिसमें वो और भी ज़्यादा सेक्सी लग रही थी। हमने पिज़्ज़ा खाया और सोफ़े पर बैठकर मूवी देखने लगे। मूवी रोमांटिक-थ्रिलर थी। जैसे-जैसे मूवी में सीन गरमा रहे थे, हमारे बीच की दूरी भी कम हो रही थी।
मैंने धीरे से अपना हाथ उसके कंधे पर रखा। उसने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि थोड़ा और मेरे करीब खिसक आई। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। मैंने हिम्मत करके उसका चेहरा अपनी ओर घुमाया और उसकी आँखों में देखा। उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं। मैंने धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
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वो पल जैसे वहीं थम गया। शुरू में वो थोड़ा झिझकी, लेकिन फिर वो भी मेरा साथ देने लगी। हमारा किस गहरा होता गया। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और पागलों की तरह चूमने लगा। मेरा हाथ कब उसकी टी-शर्ट के अंदर घुसकर उसके नरम सेबों को सहलाने लगा, मुझे पता ही नहीं चला।
“आह्ह…” उसके मुँह से एक धीमी सिसकारी निकली।
मैंने उसे सोफ़े पर लिटा दिया और उसकी गर्दन पर, उसके कानों पर चूमने लगा। वो पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी। मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी। काले रंग की ब्रा में क़ैद उसके स्तन मेरे सामने थे। मैंने एक पल भी बर्बाद नहीं किया और उन पर टूट पड़ा। मैं उन्हें चूस रहा था, मसल रहा था और वो मेरे बालों में उँगलियाँ फिरा रही थी।
वो धीरे-धीरे बोली, “आर्यन… प्लीज़…”
मैं जोश में उसकी शॉर्ट्स और पैंटी भी उतार दी। उसकी चिकनी गुफ़ा अब मेरे सामने थी, जो पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने अपनी उँगलियों से उसे सहलाना शुरू किया। वो तड़प उठी और अपनी कमर हिलाने लगी।
फिर मैंने उसे मेरा औज़ार चूसने को कहा। वो शरमा गई और बोली, “मैंने ये कभी नहीं किया।” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “आज कर लो, मज़ा आएगा।”
पहले तो वो ना-नुकर करती रही, लेकिन फिर मान गई। जैसे ही उसने मेरे सख्त औज़ार को अपने गर्म मुँह में लिया, मेरी तो जैसे जान ही निकल गई। वो किसी लॉलीपॉप की तरह उसे चूस रही थी। मैं जन्नत में था। कुछ देर बाद मैंने उसे रोका और कहा, “अब मेरी बारी।”
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रप्पा रप्पा का खेल
मैं उसे गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया। बिस्तर पर लिटाकर मैंने उसकी टाँगें फैलाईं और उसकी गीली खाई पर अपना औज़ार सेट किया। वो आँखें बंद करके गहरी साँसें ले रही थी।
“तैयार हो?” मैंने पूछा। उसने बस सिर हिला दिया।
मैंने एक ही झटके में अपना पूरा औज़ार उसकी खाई में उतार दिया। “आआह्ह…!” दर्द और मज़े से मिली-जुली एक चीख उसके मुँह से निकली। उसकी आँखों में आँसू आ गए थे।
मैं कुछ देर रुका, ताकि उसे आदत हो जाए। फिर मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। कुछ ही पलों में उसका दर्द मज़े में बदल गया और वो भी नीचे से अपनी कमर उठाकर मेरा साथ देने लगी।
“और तेज़… आर्यन… आह्ह… और तेज़…” वो सिसक रही थी।
अब मैं किसी जंगली जानवर की तरह उसे चोद रहा था। कमरे में हमारी साँसों और ‘थप-थप’ की आवाज़ के सिवा कुछ नहीं था। करीब 15-20 मिनट की इस तूफ़ानी रप्पा रप्पा के बाद, मेरा सब्र जवाब दे गया और मैंने अपना सारा गर्म लावा उसकी गुफ़ा के अंदर छोड़ दिया।
हम दोनों पसीने से भीगे हुए, हाँफते हुए एक-दूसरे पर गिर पड़े। उस रात हमने दो बार और किया। वो पहली रात मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं थी। एक अंजान पड़ोसन अब मेरी जान बन चुकी थी। उस दिन के बाद, जब भी हमें मौका मिलता, हम एक-दूसरे में खो जाते। वो बालकनी वाला इश्क़ अब बेडरूम तक पहुँच चुका था।