हाय दोस्तों, मेरा नाम साहिल है, और मैं 22 साल का हूँ। ये कहानी तब की है जब मैं 20 साल का था और गर्मियों की छुट्टियों में अपने मामा के गाँव गया था। मेरे मामा, रमेश, खेती-बाड़ी के काम से अक्सर बाहर रहते थे, और घर पर ज़्यादातर मेरी मामी, सुमन, अकेली रहती थीं।
सुमन मामी की उम्र कोई 30 साल होगी, लेकिन उनका फिगर ऐसा कि गाँव के सारे जवान लड़के उनके पीछे पागल थे। गोरा रंग, बड़ी-बड़ी नशीली आँखें, रसीले होंठ, और वो मटकती कमर—हाय! मामी किसी अप्सरा से कम नहीं थीं। मैं जब भी उन्हें देखता, मेरे अंदर एक अजीब सी गुदगुदी होने लगती थी।
शरारतों का दौर
मामी मेरे साथ बहुत फ्रैंक थीं। वो मुझे अपने बेटे जैसा मानती थीं, लेकिन उनकी बातों और छूने के अंदाज़ में एक शरारत थी, जो मुझे बेचैन कर देती थी। कभी वो मेरे बाल बिगाड़ देतीं, तो कभी जान-बूझकर मुझसे सटकर खड़ी हो जातीं। जब वो नहाकर गीले बालों और पतली साड़ी में मेरे सामने आतीं, तो उनकी गीली साड़ी उनके कर्व्स को और उभार देती थी। मेरी नज़रें उनके भरे-भरे आमों पर अटक जातीं, और वो मेरी चोरी पकड़कर मुस्कुराते हुए कहतीं, “क्या घूर रहा है, शैतान?” मैं शरमाकर चुप हो जाता, लेकिन मेरे दिल में आग सी लग जाती।
एक दिन मामा को किसी काम से दो दिनों के लिए शहर जाना पड़ा। घर पर मैं और मामी अकेले थे। उस दिन दोपहर में मौसम सुहाना हो गया था। बादल छाए थे, और हल्की ठंडी हवा चल रही थी। मामी मेरे पास आईं और बोलीं, “साहिल, बड़ी गर्मी है। चल, गन्ने के खेत की तरफ़ घूमकर आते हैं। ठंडी हवा भी लगेगी, और एक-दो गन्ने भी तोड़ लाएँगे।”
मैं तो बस इसी मौके की तलाश में था। मैंने तुरंत हाँ कर दी, और मेरे दिमाग में शरारती ख्याल घूमने लगे।
गन्ने के खेत में मस्ती
हम दोनों गाँव के बाहर बने गन्ने के घने खेतों में पहुँच गए। खेत इतना घना था कि अंदर घुसते ही बाहर की दुनिया गायब हो जाती थी। गन्ने के पत्तों की सरसराहट और ठंडी हवा एक जादुई माहौल बना रही थी। मामी ने एक गन्ना तोड़ा, छीला, और मुझे दिया। हम दोनों एक ही गन्ने से रस चूसने लगे। मेरे हाथ बार-बार उनके नरम हाथों से टकरा रहे थे, और हर टक्कर में मेरे दिल की धड़कन बढ़ जाती थी।
“बड़े शरारती हो गए हो तुम,” मामी ने मेरी आँखों में देखते हुए कहा। उनकी आवाज़ में एक शरारत थी, जो मुझे और उकसा रही थी। “आपसे ही सीखा है, मामी,” मैंने हिम्मत करके जवाब दिया। वो खिलखिलाकर हँस पड़ीं, और उनकी हँसी ने मेरे जोश को और भड़का दिया।
अचानक वो भागने लगीं, और मैं उनके पीछे दौड़ा। गन्ने के पौधों के बीच लुका-छिपी का ये खेल बड़ा मज़ेदार था। आखिरकार मैंने उन्हें पकड़ लिया, और हम दोनों हँसते-हँसते ज़मीन पर गिर पड़े। मैं उनके ऊपर था, और हमारी साँसें एक-दूसरे से टकरा रही थीं। उनकी नशीली आँखें मुझे बुला रही थीं। मुझसे रहा नहीं गया। मैंने धीरे से झुककर उनके रसीले होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
मामी ने एक पल के लिए भी विरोध नहीं किया। उनकी आँखें बंद हो गईं, और वो मेरे चुम्बन का जवाब देने लगीं। वो किस इतना गहरा था कि मैं उनके होंठों का मीठा रस पीता रहा। मेरे हाथ उनकी कमर पर चले गए, और मैं उनकी नरम त्वचा को सहलाने लगा।
अंधेरे में आग
उस वक्त सूरज ढल रहा था, और खेत में अंधेरा छाने लगा था। आसपास कोई नहीं था, बस गन्ने के पत्तों की सरसराहट और हमारी साँसों की आवाज़ थी। मैंने धीरे से उनकी साड़ी का पल्लू हटाया। उनके ब्लाउज़ में क़ैद भरे-भरे स्तन मेरे सामने थे। मेरा हाथ अपने आप उनके ब्लाउज़ पर चला गया, और मैं उन्हें धीरे-धीरे दबाने लगा। “आह्ह… साहिल…” मामी के मुँह से एक मदहोश सिसकारी निकली।
उनकी आवाज़ ने मेरे जोश को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया। मैंने जल्दी से उनके ब्लाउज़ के हुक खोल दिए। उनके गोरे, भरे हुए स्तन आज़ाद हो गए। मैं उन पर टूट पड़ा और किसी भूखे बच्चे की तरह उन्हें चूसने लगा। मामी की उंगलियाँ मेरे बालों में घूम रही थीं, और वो मेरा सिर अपने सीने पर और दबा रही थीं। “बस करो… कोई आ जाएगा…” वो हाँफते हुए बोलीं, लेकिन उनकी आवाज़ में रोक-टोक नहीं, बल्कि और करने की गुज़ारिश थी।
मैंने उनकी साड़ी को उनकी कमर तक उठा दिया। उन्होंने नीचे कुछ नहीं पहना था। उनकी चिकनी, गोरी जाँघें और उनकी नम गुफ़ा देखकर मैं पागल हो गया। मैंने अपना मुँह नीचे किया और उनकी योनि को चूम लिया। मामी तड़प उठीं, उनकी साँसें और तेज़ हो गईं। मैंने अपनी जीभ से उनकी गीली गहराइयों को चाटा, और उनकी सिसकियाँ अब कराहों में बदल गईं—“उह्ह… साहिल… और…”
मैंने जल्दी से अपनी पैंट उतारी। मेरा सख्त औज़ार देखकर मामी की आँखें चमक उठीं। “ये तो… बहुत बड़ा है… आराम से करना,” वो शरमाते हुए बोलीं। मैंने उनकी टाँगें उठाईं और अपने औज़ार को उनकी गीली खाई के मुँह पर सेट किया। एक ही झटके में मैंने पूरा अंदर डाल दिया। “आआह्ह… माँ…!” मामी की दबी हुई चीख निकली।
मैं कुछ पल रुका, फिर धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। गन्ने के पत्तों की सरसराहट हमारी ‘थप-थप’ की आवाज़ के साथ मिल गई थी। मामी भी अब पूरा साथ दे रही थीं, अपनी कमर उछालकर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थीं। “और ज़ोर से… साहिल… आज बुझा दे मेरी प्यास… आह्ह…” उनकी बातें मुझे और उकसा रही थीं।
उस अंधेरे गन्ने के खेत में मैंने अपनी मामी को जमकर प्यार किया। जब मेरा गर्म लावा उनकी योनि में गिरा, हम दोनों थककर एक-दूसरे पर गिर पड़े। उस दिन गन्ने का रस पहले से कहीं ज़्यादा मीठा लग रहा था।
घर वापसी और राज़
जब हम खेत से बाहर निकले, तो रात हो चुकी थी। आसमान में तारे चमक रहे थे, और हमारे चेहरों पर एक अलग ही सुकून और शरारत भरी मुस्कान थी। घर पहुँचकर मामी ने मुझे गले लगाया और कहा, “साहिल, ये हमारा राज़ है। किसी को कुछ पता नहीं चलना चाहिए।” मैंने हँसकर कहा, “मामी, ये राज़ मेरे दिल में हमेशा रहेगा।”
अगले दिन मामा वापस आए, और सब कुछ सामान्य हो गया। लेकिन मेरे और मामी के बीच वो गुप्त नज़रों का खेल चलता रहा। हर बार जब हम अकेले होते, वो शरारत भरी मुस्कान और हल्का सा स्पर्श मेरे दिल को फिर से बेकरार कर देता।
प्यार और डर
मामी को पटाना आसान नहीं था। वो मेरी मामी थीं, और रिश्ते का डर हमेशा मेरे मन में था। लेकिन उनकी शरारतें, उनकी खुली बातें, और वो गन्ने के खेत का जादू—सब कुछ मेरे लिए एक सपने जैसा था। मैंने धीरे-धीरे उनका भरोसा जीता, और वो पल मेरी जिंदगी का सबसे रोमांचक हिस्सा बन गया।
उस गर्मी की छुट्टियों का वो राज़ आज भी मेरे दिल में बस्ता है। मामी की वो नशीली आँखें, उनकी गर्म साँसें, और गन्ने के खेत का वो अंधेरा—ये सब मेरी जिंदगी का एक ऐसा खजाना है, जो मैं कभी नहीं भूल सकता।